एसएसपी आवास के लैंड लाइन पर सुप्रीम कोर्ट का पूर्व चीफ जस्टिस बनकर फोन करने के जुर्म में कोर्ट ने एक युवक को तीन साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। युवक पर पूर्व चीफ जस्टिस बनकर एक युवक का शस्त्र लाइसेंस निकलाने की सिफारिश करने और ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी से गाली गलौच करने के आरोप लगे थे। कोर्र्ट में चले अभियोग में एसएसपी निवास पर टेलीफोन ड्यूटी पर तैनात सिपाही रघुबीर सिंह ने 23 मार्च 2012 को शहर थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि लैंड लाइन फोन पर मोबाइल से काल आई। फोन करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को सुप्रीम कोर्ट का पूर्व चीफ जस्टिस बाला कृष्णन बताकर एसएसपी अशोक कुमार से बात करवाने के लिए कहा। एसएसपी के सामने भी फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को सुप्रीम कोर्ट का पूर्व जस्टिस बाला कृष्णन बताया था। उसने एसएसपी से जींद के आसरी गेट निवासी संजय कुमार के रिवाल्वर की लाइसेंस की फाइल जल्द निकलवाने के लिए कहा था। फोन करने वाले व्यक्ति पर संदेह के चलते एसएसपी ने तुरंत निर्देश देकर फोन की आईडी को निकलवाई तो वह आशरी गेट निवासी संजय कुमार का निकला। इसी दौरान खुलासा हुआ था कि तथाकथित सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने संजय कुमार ने एसएसपी को फोन करने से पूर्व तत्कालीन शहर थाना प्रभारी रोहताश पांचाल को भी फोन कर खुद को मानवाधिकार आयोग का चेयरमैन बता कर संजय कुमार की रिवाल्वर के लाइसेंस की फाइल को तुरंत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पहुंचाने के बारे में कहा था। शहर थाना पुलिस ने सिपाही रघुबीर सिंह की शिकायत पर संजय के खिलाफ दूसरे के नाम तथा पद का दुरुपयोग करने, जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया था। तब इस मामले में तत्कालीन शहर थाना प्रभारी रोहताश पांचाल ने संजय का पुलिस रिमांड लेकर उससे गहन पूछताछ की थी। तब से मामला कोर्ट में विचाराधीन था। कोर्ट ने दूसरे के पद का दुरुपयोग करने और पुलिसकर्मी को धमकी देने के जुर्म में दोषी करार दिया और तीन वर्ष की कैद व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।