जनस्वास्थ्य विभाग में फर्जी बिल लगाकर किए गए 24 लाख रुपये से अधिक के घोटाले की जांच अब विभाग की विजिलेंस करेगी। इसके लिए विजिलेंस ने अधिकारियों से रिकार्ड मांगा है। वहीं इसी प्रकार के एक अन्य मामले में एक जिला स्तरीय अधिकारी का भी नाम आ रहा है। अमर उजाला ने इस घोटाले और इसके बाद हुई कार्रवाई को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद विभाग की विजिलेंस भी सक्रिय हो गई है। गौरतलब है कि जनस्वास्थ्य विभाग के एक एसडीओ तथा दो क्लर्कों पर 24,84,745 रुपये के फर्जी बिलों का भुगतान किया है। इस मामले के सामने आने के बाद दो क्लर्कों को निलंबित किया जा चुका है। अब विजिलेंस मामले में अन्य अधिकारियों की भूमिका, ठेकेदार और बिल देने वाली फार्मों की भी जांच कर सकता है।
ठेकेदारों के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर
हैरानी की बात है कि विभाग के दो-दो कर्मचारियों को घोटाले के बाद निलंबित करने वाले अधिकारियों ने अभी तक ठेकेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। यह विभाग में भी चर्चा का विषय है।
इस मामले में कुछ जानकारियों विभाग की विजिलेंस ने मांगी थी, जो उपलब्ध करवा दी गई हैं। अभी इस मामले में और कोई प्रगति नहीं है। मामले की जांच उच्च अधिकारियों द्वारा की जा रही है। मुख्यालय से जैसे आदेश आएंगे, उसके अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बीपी शर्मा, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग जींद।