ईक्कस गांव में स्थित डाइट के प्राचार्य पर कथित तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। गांव की ही ग्राम सुधार समिति ने प्राचार्य पर नियमों को ताक पर रखते हुए सरकारी संपत्ति और राशि का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए हैं। मामले की जांच नगराधीश डॉ. किरण सिंह द्वारा की जा रही है। ग्राम सुधार समिति सदस्य दिलबाग सिंह ने प्राचार्य के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामले में छह जून को राज्य विजिलेंस ब्यूरो के अतिरिक्त मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग के निदेशक और वन संरक्षक अधिकारी को शिकायत भेजी थी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने नगराधीश डॉ. किरण सिंह को जांच के आदेश दिए गए। नगराधीश ने 25 जुलाई और 29 अगस्त को शिकायतकर्ता पक्ष को बुलाकर सबूत देने को कहा। वहीं सीएम विंडो पर लगाई गई शिकायत की जांच के लिए जिला अधिकारी वंदना गुप्ता को अधिकृत किया गया।
ये हैं आरोप
1. शिक्षा विभाग से बगैर अनुमति लिए प्राचार्य ने संस्थान के प्रांगण से मिट्टी उठवाकर ईक्कस गांव में किसी परिचित के यहां प्लाट का भरत करवा दिया। मिट्टी भरवाने का पूरा खर्च उक्त प्लाट मालिक से लिया गया। साथ ही इस खर्च को बिल लगाकर संस्थान के फंड में दिखाया।
2. वन विभाग से बगैर अनुमति लिए संस्थान में लगे करीब 2200 पौधों को नष्ट किया या कटवा कर बेच दिया गया। पेड़ों को कटवाने के लिए बोली के लिए कोई विज्ञापन भी जारी नहीं किया गया।
3. संस्थान द्वारा शिक्षा विभाग से बगैर अनुमति और कोटेशन के पुराना जनरेटर खरीदा गया। इसमें बड़े स्तर पर गोलमाल किया गया। इस जनरेटर पर खरीद से ज्यादा रिपेयरिंग पर खर्च दिखाया गया। विभाग के नियमानुसार 20 हजार से ज्यादा का सामान खरीदने के लिए अनुमति लेना अनिवार्य है।
तबादला होने के बावजूद रिलीव नहीं हुए प्राचार्य
शिकायतकर्ता दिलबाग के अनुसार 13 मई को प्राचार्य जयवीर ढांडा का तबादला डाइट ईक्कस से फतेहाबाद बतौर डीईओ के पद पर हुआ है। इसके बावजूद वे यहां से रिलीव नहीं हुए हैं। साथ ही प्राचार्य पर आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में तथ्य छुपाने का आरोप भी लगाया। शिकायतकर्ता ने बताया कि कुछ अन्य सबूत भी नगराधीश को सौंपे जाएंगे।
चल रही है जांच
मामले की जांच चल रही है। कुछ पक्षों पर जिला शिक्षा अधिकारी से जांच करके रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। दोनों पक्षों ने अपना पक्ष रखा है। शिकायतकर्ता पक्ष कुछ अन्य सबूत और देने की बात कह रहा है। पूरे मामले की जांच के बाद रिपोर्ट विभाग को भेज दी जाएगी। -डॉ. किरण सिंह, नगराधीश