सफीदों थाने में साढ़े तीन साल पहले झगड़े के मामले से नाम काटने की एवज में दो हजार रुपये की रिश्वत लेने के लिए आरोपी हवलदार को अदालत ने तीन साल की कैद की सजा सुनाई है।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार 28 मई 2012 को रत्ताखेड़ा निवासी राममेहर ने विजिलेंस विभाग को शिकायत दी थी कि उसकी माह गांव में रंजिश के चलते झगड़ा हो गया था। इसमें उसके बेटे जोनी के खिलाफ मामला दर्ज हो गया। हवलदार ओमप्रकाश उसका नाम भी इस मामले में शामिल करने का डर दिखा रहा था। हवलदार ने झगड़े के मामले से नाम निकलवाने की एवज में रिश्वत की मांग रह रहा था। इस दौरान उसने पांच हजार रुपये रिश्वत भी दे दी, लेकिन उसके बावजूद उसका नाम एफआईआर में शामिल करने का डर दिखाकर दो हजार रुपये की डिमांड की। विजिलेंस विभाग ने छापामार दल का गठन करके आरोपी हवलदार को दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू कर लिया था। तभी से मामला अदालत में विचाराधीन था। अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए हवलदार ओमप्रकाश को तीन वर्ष की कैद की सजा सुनाई है।