उत्तर प्रदेश के मेरठ में जींद प्रशासन द्वारा लिंग परीक्षण के आरोप में की गई रेड के बाद भी आरोपियों को जींद नहीं लाया जा सका है। कानूनी पेचीदगी के चलते जींद पुलिस ने आरोपियों को 30 दिसंबर तक पेश होने का समय दिया है।
मेरठ पुलिस ने भी लिखित में भरोसा दिया है कि पुलिस आरोपियों को हर हाल में पेश करेगी। ऐसे में आरोपी चिकित्सकों को अब 30 दिसंबर तक जींद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। ऐसा नहीं करने पर जींद पुलिस अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और कोर्ट के माध्यम से आरोपियों को जींद लाने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, जींद पुलिस ने अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर अपने कब्जे में ले लिया है। मशीन की जांच अब मधुबन लैब में करवाई जाएगी। इससे भी कई प्रकार के राज खुलने की संभावना है।
कानून की कमजोरी
पुलिस के अनुसार कानूनी कमजोरी के कारण आरोपियों को राहत मिली है। एसएसपी अभिषेक जोरवाल के अनुसार इस मामले में आरोपी को अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में आरोपियों को पुलिस बेल पर ही आसानी से छोड़ दिया गया है।
काले कारनामे का रिकॉर्ड जब्त
प्रशासन ने आरोपी चिकित्सक के काले कारनामों का रिकॉर्ड जब्त कर लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, आरोपी चिकित्सक की अल्ट्रासाउंड मशीन पहले भी तीन बार सील हो चुकी है, लेकिन खुल जाती है। ऐसे में रिकार्ड से प्रशासन को यह जानकारी मिल सकती है कि क्षेत्र से कितने केस वहां जाते रहे हैं।
सुमन से जुड़ती गई कड़ी
इस मिशन को अंजाम तक पहुंचाने में लगी स्वास्थ्य विभाग की टीम पहले जींद शहर की ही रहने वाली एक सुमन नामक महिला के संपर्क में आई। महिला को इसकी भनक नहीं थी कि जो लोग लिंग परीक्षण के लिए बातचीत कर रहे हैं, वे स्वास्थ्य विभाग के हैं। ऐसे में महिला पहले शामली में एक और व्यक्ति के पास इन लोगों को ले गई। इसके बाद सभी लोग उत्तर प्रदेश के बुडाला गए और यहां से इन लोगों को विश्वास होने के बाद मेरठ के बच्चा पार्क स्थित गर्ग अल्ट्रासाउंड क्लीनिक पर गए।
उत्तर प्रदेश पुलिस से नहीं मिला सहयोग
रेड के लिए मेरठ गई जींद प्रशासन की टीम के अनुसार, पूरे मामले में यूपी पुलिस से सहयोग नहीं मिला। यही कारण है कि आरोपियों को जींद नहीं लाया जा सका। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, मेरठ की सिविल लाइन थाना पुलिस ने छापामार टीम को रोकने के लिए शहर में नाकेबंदी तक करवाई। यूपी पुलिस के व्यवहार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहां के पुलिस अधीक्षक सिविल लाइन चौकी पहुंचे और टीम के सदस्यों से उनकी कानूनी हैसियत पूछने लगे।
यूं बनी रणनीति
सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ के अनुसार सूचना मिली थी कि जींद की एक महिला महिलाओं को लिंग परीक्षण के लिए यूपी ले जाती है। इस पर स्वास्थ्य विभाग की एक कर्मचारी को गर्भवती बनाकर संबंधित महिला के पास भेजा गया। पहले महिला को शामली ले जाकर यहां अहसान नामक व्यक्ति से मिलवाया गया। अहसान ने गर्भवती महिला को मेरठ निवासी दूसरे फैजल से पहचान करवाई। ल महिला को डॉ. परिणिति के पास ले गया। डॉ. परिणिति ने गर्ग अल्ट्रासाउंड केंद्र के संचालक डॉक्टर विनोद गर्ग से बातचीत की। छह हजार रुपये में सौदा तय होने के बाद गर्भवती महिला को डॉ. विनोद गर्ग के अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ले जाया गया। राशि कर्मचारियों को सौंपने के बाद डॉ. विनोद गर्ग की पत्नी डॉ. सरिता गर्ग ने गर्भ में शिशु के लिंग परीक्षण का जिम्मा लिया। सिविल सर्जन के अनुसार जिस समय लिंग परीक्षण के लिए अल्ट्रासाउंड किया जा रहा था, टीम ने छापा मारकर डॉक्टर को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
महिला को सरकारी गवाह बनाने की तैयारी
इस मामले में जींद प्रशासन अब दलाल महिला को सरकारी गवाह बनाने की योजना तैयार कर रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि जींद शहर की सुमन नामक महिला ही भ्रूण लिंग जांच मामले में राज खोल सकती है।