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दरोली खेड़ा में तालाब से मछली निकालने को लेकर ग्रामीण हुए आमने-सामने

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तालाब से मछली निकालने को लेकर ग्रामीण आमने-सामने
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अमर उजाला ब्यूरो
उचाना। तालाब से निकाली जाने वाली मछलियों को लेकर दो पक्ष आमने-सामने हो गए। दरोली खेड़ा गांव में हुए विवाद को बढ़ने से बचाने के लिए पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में तालाब से मछलियां निकलवाई गईं। ग्रामीणों ने तालाब से मछली निकालने की प्रक्रिया का विरोध किया तो सरपंच पक्ष के लोगों ने इस प्रक्रिया को कानून के हिसाब से बताया। किसी घटना के अंदेशे से गांव में भारी संख्या में पुलिस बल मछली निकाले जाने तक मौजूद रहा। फिलहाल पंचायत ने मछलियां निकाल ली हैं।
ग्रामीण पिरथी, रामकुमार, बलवंत, वेदी, सतबीर ने कहा कि जिस जमीन पर तालाब बना हुआ है, वहां उनके प्लाट हैं। प्रशासन को चाहिए कि प्लॉटों की पैमाइश करवा कर नए सिरे से तालाब की खुदाई करवाई जाए। तालाब में मछलीपालन का ठेका नहीं दिया, क्योंकि यहां पर गांव के पशु पानी पीने आते हैं। जो छोटी मछली होती है, वो पानी पीते समय पशुओं के शरीर के अंदर चली जाती है। 2015 में तालाब का ठेका लेने वाले ठेकेदार पवन ने कहा कि 16 लाख 15 हजार रुपये में तीन साल के पट्टे पर दो तालाबों की बोली दी थी। तालाब की जो बोली पंचायत ने करवाई है वो गलत तरीके से करवाई गई है। अदालत में पंचायत के खिलाफ केस चल रहा है। जब तक फैसला नहीं आता, तब तक तालाब की बोली करना गलत है। बीडीपीओ, सरपंच ने मिलीभगत करके यह बोली करवाई है। जब तक अदालत का फैसला नहीं आता, बोली को रद्द किया जाए। इसको लेकर पुलिस थाना में शिकायत भी दी है।
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14 दिसंबर को पंचायत द्वारा तालाब की बोली करवाई गई। पंचायत को बोली करवाने का अधिकार है। जो पवन ठेकेदार है, उनका पंचायत विभाग के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। जिन्होंने तालाब का ठेका दिया था, वह उनसे अपना हिसाब करें। सरपंच नसीब ने कहा कि गांव के कुछ लोगों के चंगुल से तालाब को छुड़वाया है। वो तालाब पर कब्जा किए हुए थे। जो भी बोली की प्रक्रिया है वो नियमानुसार की गई है। उन पर जो आरोप लगाए गए हैं वे निराधार हैं।
महेंद्र नेहरा, बीडीपीओ उचाना।
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