बुढ़ापा पेंशन लेने के लिए बार-बार बैंक के चक्कर कटवा रहे बैंक अधिकारियों के रवैये से परेशान वृद्ध ने जन उपयोगी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। जन उपयोगी अदालत ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए संबंधित बैंक अधिकारियों को आगामी 16 अक्तूबर को अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं।
शहर के सुभाष नगर निवासी 73 वर्षीय वेदप्रकाश और उनकी 71 वर्षीय पत्नी पनमेश्वरी का बैंक खाता घर के नजदीक की शाखा की बजाए एसएसपी आवास के नजदीक देवीलाल ग्राउंड में स्थित कार्पोरेशन बैंक में खोला गया है। वेदप्रकाश गत 11 सितंबर को बुढ़ापा पेंशन लेने के लिए कार्पोरेशन बैंक में पहुंचे थे। पनमेश्वरी बीमारी के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हैं। बुजुर्ग वेदप्रकाश ने बैंक अधिकारियों को अपनी पत्नी की बीमारी से अवगत कराते हुए बैंक अधिकारियों को लूज ड्राफ्ट देकर हस्ताक्षर और अंगूठा लगवाने के लिए मिन्नतें की।
बुजुर्ग वेदप्रकाश औपचारिकता पूरी कर वापस बैंक में पहुंचे तो बैंक अधिकारियों ने लूज ड्राफ्ट पर लगे अंगूठे को मानने से इंकार कर दिया। वेदप्रकाश ने बैंक अधिकारियों को अपनी पूरी स्थिति से अवगत कराया लेकिन बैंक कर्मी नहीं माने। बुजुर्ग वेदप्रकाश ने आरोप लगाया कि इस दौरान बैंक अधिकारियों ने उसके साथ दुर्व्यवहार भी किया। बैंक अधिकारियों के रवैये से परेशान बुजुर्ग कोर्ट परिसर पहुंचे और यहां वकील के माध्यम से जन उपयोगी अदालत में याचिका दायर की। जन उपयोगी अदालत ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए कार्पोरेशन बैंक के मैनेजर को 16 अक्तूबर को अदालत में पेश होकर जवाब देने के लिए आदेश दिए हैं।
वृद्ध के मान-सम्मान को बैंक ने पहुंचाई है ठेस
नियम के अनुसार वृद्धावस्था पेेंशन के लिए बुजुर्गों का खाता घर के नजदीक स्थित बैंक में खोला जाना चाहिए था। जबकि इस बुजुर्ग दंपति का खाता घर से दूर की बैंक शाखा में खोला गया है। वृद्ध महिला चलने फिरने में लाचार है। महिला के पति ने बैंक की सभी औपचारिकता पूरी कर लूज ड्राफ्ट बैंक में पेश किया था। बैंक अधिकारियों को अगर वृद्धा की पेंशन नहीं देनी थी तो वृद्ध के चक्कर नहीं लगवाने चाहिए थे। बैंक अधिकारियों ने वृद्ध के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाई है। वृद्ध की आपबीती सुनने के बाद जन उपयोगी अदालत में बैंक के खिलाफ याचिका दायर की है। 16 अक्तूबर को बैंक मैनेजर को जन उपयोगी अदालत में जवाब देना होगा।
विनोद बंसल, एडवोकेट