नागरिक अस्पताल के पीपी सेंटर से कोरोना वैक्सीन की चोरी अधिकारियों के गले नहीं उतर रही है। एक तो कारोना वैक्सीन सरकार द्वारा मुफ्त लगाई जा रही है। दूसरा कोरोना वैक्सीन को दो से आठ डिग्री तापमान पर ही रखना होता है। यदि एक घंटे तक दवा को यह तापमान नहीं मिले तो यह प्रयोग के लायक नहीं रहेगी। वहीं चिकित्सकों का मानना है कि दवा की चोरी रेमडेसिविर इंजेक्शन के चक्कर में भी हो सकती है। बहरहाल आरोपियों के पकड़े जाने पर ही इसका खुलासा होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना टीकाकरण प्रोटोकोल के हिसाब से चोरी की गई दवा का प्रयोग नहीं किया सकता। दरअसल दवा की पूरी जानकारी व मरीज की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी होती है। जहां टीकाकरण होगा वहां दवा खोलते ही सबसे पहले ऑनलाइन का लॉट नंबर दर्ज करना होता है। वहीं यदि बिना किसी भी रिकार्ड के दवा की डोज लोगों को दी जाती हैं और इससे यदि कोई दुष्प्रभाव शरीर पर आता है, वह काफी खतरनाक होगा।
दवा बर्बाद होने की संभावना ज्यादा
चोरी से दवा बर्बाद होने की संभावना ज्यादा है। वहीं इस प्रकार स्टोर से बाहर रहने पर दवा प्रयोग लायक भी नहीं बचेगी। ऐसे में नहीं लगता कि दवा का प्रयोग किया जाएगा। दवा चोरी सिर्फ जींद नागरिक अस्पताल के स्टॉक से हुई है। जिले के स्टोर से तुरंत दवा जारी की गई। करीब 1700 डोज उपलब्ध थी। इसके अलावा अन्य टीकाकरण केंद्रों पर भी दवा थी। लोगों को टीकाकरण में कोई परेशानी नहीं आने दी गई है।
डॉ. रमेश पांचाल, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी।