जींद। जैसे-जैसे नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या कम होती जा रही है, वैसे-वैसे नागरिक अस्पताल में ऑक्सीजन की खपत भी कम होती जा रही है। दस दिन पहले नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 2.5 टन ऑक्सीजन की खपत होती थी जो घटकर 1.5 टन पर आ गई है। अब जिले में न तो ऑक्सीजन के लिए मारामारी है। न ही इसकी कमी। अस्पताल में मरीज कम होने के कारण स्वास्थ्य विभाग को भी काफी राहत मिली है।
कोरोना काल से पहले नागरिक अस्पताल में दस सिलिंडर ऑक्सीजन की खपत होती थी। पिछले वर्ष सितंबर से नवंबर महीने में औसतन 50 ऑक्सीजन सिलिंडर लगने लगे। इस बार अप्रैल महीने के अंतिम सप्ताह से जिले में ऑक्सीजन की खपत अधिक होने लगी। मई महीने के शुरुआती सप्ताह में ऑक्सीजन की खपत एक टन से अधिक होने लगी। 15 मई के आसपास जिले में कोरोना संक्रमण पीक पर पहुंचा तो ऑक्सीजन की खपत भी 2.5 टन तक पहुंच गई। नागरिक अस्पताल में तीन टन का ऑक्सीजन टैंक लगाया हुआ है। इससे नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग में पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। वहीं पुरानी बिल्डिंग में सिलिंडरों के माध्यम से ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। अब पुरानी बिल्डिंग में भी एक जगह ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर पूरी बिल्डिंग में ऑक्सीजन सप्लाई दी जाती है। 15 से 20 मई तक जिले में ऑक्सीजन के लिए काफी मारामारी रही। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 100 से अधिक सिलिंडर आने लगे और तीन दिन में ऑक्सीजन टैंक भी भरवाया जाने लगा। 22 मई के बाद नागरिक अस्पताल में धीरे-धीरे मरीजों की संख्या कम होने लगी और ऑक्सीजन की निर्भरता भी कम होने लगी। फिलहाल नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1.5 टन ऑक्सीजन लगती है। इनमें से 100 ऑक्सीजन सिलिंडर तथा आधा टन ऑक्सीजन टैंक से ऑक्सीजन का प्रयोग किया जाता है।
1.5 टन में से काफी ऑक्सीजन हो रही खराब
नागरिक अस्पताल में इस समय 1.5 टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है। लेकिन इतनी ऑक्सीजन मरीजों को नहीं मिल रही है। इसमें से काफी ऑक्सीजन खराब हो रही है। इसका सबसे बड़ा कारण मरीज के तीमारदार हैं। काफी मरीजों के तीमारदार जितनी मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत होती है, उससे अधिक ऑक्सीजन का प्रेशर खोल लेते हैं। जब मरीज बाथरूम आदि के लिए जाता है, उस समय भी ऑक्सीजन चलती रहती है। इस कारण काफी ऑक्सीजन खराब हो जाती है।
नागरिक अस्पताल में इस समय 1.5 टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है। मरीज को जितनी ऑक्सीजन चाहिए, तीमारदार उससे अधिक ऑक्सीजन खोल लेते हैं। कई बार इन लोगों को समझाया भी है कि ऑक्सीजन रेगुलेटर से छेड़छाड़ न करें। लेकिन यह लोग ऐसा करने से बाज नहीं आ रहे। इसके अलावा जब भी मरीज को बाथरूम या अन्य जांच के लिए जाना होता है, तब वह कर्मचारियों को नहीं बताते, जिस कारण ऑक्सीजन चलती रहती है। मरीज को जब कहीं जाना हो तो कर्मचारियों से बोलकर ऑक्सीजन बंद करवानी चाहिए। -डॉ. गोपाल गोयल, एसएमओ।