जींद। शहर में जगह-जगह सड़कों पर बैठे बेसहारा पशु अब दिखाई नहीं देंगे। नगर परिषद मंगलवार से बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में छोडने का अभियान शुरू कर रही है। इससे सर्दी के समय इन पशुओं को गोशालाओं व नंदिशालाओं में आश्रम तो मिलेगा ही, साथ ही सड़कों पर इन पशुओं के कारण हो रही दुर्घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। दो महीने पहले इन पशुओं को पकड़ने का अभियान लंपी चर्म रोग आने के कारण बंद कर दिया था। अब गायों को गोशाला तथा नंदियों को नंदीशाला में छोड़ा जाएगा। इन पशुओं को गोशाला में छोड़ते समय टैग लगाए जाएंगे।
अकेले जींद शहर में लगभग पांच हजार बेसहारा पशु घूम रहे हैं। हर कॉलोनी की गलियों व सड़कों पर यह पशु देखे जा सकते हैं। शहर के बीचोंबीच से गुजरने वाली मुख्य सड़क पर तो जेल से लेकर रेलवे स्टेशन पर रात के समय इन पशुओं का जमावड़ा हो जाता है। शहर की स्ट्रीट लाइट अधिकतर समय खराब रहती हैं। इस कारण कई वाहन इन पशुओं से टकरा जाते हैं। इससे पशु को तो चोट लगती ही है, साथ ही वाहन चालक भी घायल हो जाते हैं। शहर के लोग बार-बार इन पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ने की गुहार लगाते हैं। नगर परिषद द्वारा डेढ़ वर्ष पहले बेसहारा पशुओं को गोशाला में छोडने का टेंडर दिया गया था। यह टेंडर 400 रुपये प्रति पशु था। ठेकेदार के रिकार्ड के अनुसार उसने लगभग 900 पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ा था। उस समय शहर में इक्का-दुक्का ही सड़कों पर पशु दिखाई देते थे लेकिन अब फिर से पशुओं की भरमार सड़क पर हो गई है। दो महीने पहले फिर से इन पशुओं को पकडने का ठेका 486 रुपये प्रति पशु दिया गया था लेकिन लंपी चर्म रोग की बीमारी आने के कारण इन पशुओं को नहीं छोड़ा जा सका। अब फिर यह अभियान मंगलवार से शुरू किया जा रहा है।
सांड़ की टक्कर से छह वर्ष पहले पूर्व विधायक डॉ. हरिचंद मिड्ढा की गई थी जान
लगभग छह वर्ष पहले पूर्व विधायक डॉ. हरिचंद मिड्ढा को भी एक सांड़ ने टक्कर मारी थी। इसके बाद डॉ. हरिचंद मिड्ढा ठीक नहीं हो पाए थे और उनकी मौत हो गई थी। लगभग 15 वर्ष पहले नागरिक अस्पताल से निकलते समय डॉ. अश्विनी की कार के सामने एक गाय आ गई थी। उसे बचाने के चक्कर में उनकी कार पलट गई थी और उनकी मौत हो गई थी। इसके अलावा बेसहारा पशुओं से टकराकर चोटिल होने के मामले तो अनेक हैं। पुरानी सब्जीमंडी मोड पर भी लगभग छह वर्ष पहले दो सांड आपस में लड़ते हुए एक रिक्शा पर गिर गए थे। इससे रिक्शा चालक की मौत हो गई थी।
पशुपालन विभाग के कर्मचारी करेंगे पशुओं की टैगिंग
नगर परिषद द्वारा नंदियों व गायों को पकड़कर नंदीशाला व गोशाला में छोडने के लिए ठेका दिया हुआ है। ठेकेदार को एक पशु के बदले 486 रुपये दिए जाएंगे। बाकायदा इन पशुओं की टैगिंग की जाएगी। पशुपालन विभाग के कर्मचारियों की इसके लिए ड्यूटी लगाई गई है। पशुपालन विभाग के कर्मचारी ठेकेदार द्वारा पकड़े गए पशुओं को टैग लगाएंगे और इसके बाद इनको नंदीशाला व गोशाला में छोड़ा जाएगा।
बेसहारा पशुओं को पकडने का अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। रात को ही यह अभियान शुरू हो जाएगा। इसके लिए पशुपालन विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने के लिए कहा गया है ताकि पशुओं की टैगिंग की जा सके। बेसहारा पशुओं से शहर के लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
-डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद।