कोरोना की दूसरी लहर में बच्चे भी अछूते नहीं हैं, हालांकि अच्छी बात यह है कि कोरोना संक्रमित होने के बावजूद किसी भी बच्चे में गंभीर लक्षण नहीं हुए। बच्चों को बुखार, खांसी व जुकाम हुआ है, लेकिन साधारण दवा से वे ठीक हो गए। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना का यह विशेष स्ट्रेन बच्चों को कम प्रभावित कर रहा है। अप्रैल में जिले में करीब 70 बच्चों में संक्रमण पाया गया।
केस एक
खरकरामजी गांव निवासी रामकेश दिल्ली में शिक्षक हैं। उनकी दो बेटी 11 वर्षीय अंशुल व 10 वर्षीय अन्नू 25 मार्च को कोरोना संक्रमित हुई थी। इसके बाद इनमें बीमारी के खास लक्षण नहीं आए। कोरोना संक्रमित मिलने पर छोटी बच्चियों को अलग भी नहीं रखा जा सकता था। ऐसे में चिकित्सकों द्वारा दी गई दवा के साथ पौष्टिक आहार देकर कोरोना को हरा दिया।
केस दो
कैथल के चीका निवासी एक साल की लिया भी पिछले महीने संक्रमित हुई थी। लिया को सिर्फ बुखार व जुकाम हुआ था। लिया नरवाना में अपने मामा के घर आई हुई थी। यहां अच्छी देखरेख के चलते वह करीब एक सप्ताह में ही ठीक होकर अपने घर लौट गई।
केस तीन
लुदाना गांव निवासी मनोज का 11 वर्षीय बेटा प्रिंस कोरोना संक्रमित हुआ। मनोज के अनुसार उसे कोई खास परेशानी नहीं थी, लेकिन संक्रमण के कारण चिकित्सकों द्वारा दी गई दवा के साथ अन्य पूरक आहार भी दिया गया। प्रिंस भी एक सप्ताह में ठीक हो गया।
छह माह से बड़े बच्चे को तुलसी व अदरक उबालकर दूध पिला सकते हैं...
यह कोरोना का विशेष स्ट्रेन है। इसमें बच्चों पर अधिक असर नहीं हो रहा है। हालांकि यदि बच्चा संक्रमित आ जाता है तो उसे दूर नहीं रखा जा सकता। ऐसे में चिकित्सकों द्वारा दी गई दवा दें। इसके अलावा यदि बच्चा छह माह से बड़ा है तो उसे दूध में तुलसी व अदरक उबालकर पिलाया जा सकता है। इसके अलावा फल या फलों का रस भी दें।
- डॉ. सीमा वशिष्ठ, बाल रोग विशेष, नागरिक अस्पताल जींद।