23 सब डिवीजनों के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी 28 व 29 जून को हड़ताल पर अडिग हैं। बिजली कर्मचारियों की यह हड़ताल मंगलवार रात्रि 10 बजे से ही शुरू हो जाएगी। कर्मचारियों ने दो दिन की हड़ताल को लेकर सोमवार शाम को मीटिंग कर नारेबाजी की। बिजली निगम द्वारा हड़ताल के दौरान उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न होने देने का दावा किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर दिए गए हैं। प्रत्येक बिजली घर पर पुलिस तैनात रहेगी। साथ ही निगम कर्मचारियों द्वारा निजी क्षेत्र से अतिरिक्त कर्मचारी हायर किए गए हैं। वहीं बिजली कर्मचारियों का कहना है 29 व 30 जून को शांतिपूर्वक तरीके से हड़ताल करेंगे। इस दौरान बिजली कर्मचारियों द्वारा कहीं भी बिजली नहीं काटी जाएगी, लेकिन अगर कहीं कोई फाल्ट आता है, तो उसे वे ठीक भी नहीं करेंगे। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का अन्य विभागों के कर्मचारी भी समर्थन कर रहे हैं।
क्या हैं बिजली कर्मचारियों की मांगें
बिजली कर्मचारी 23 सब डिवीजनों का सरकार द्वारा निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। बिजली कर्मचारियों के अनुसार प्रदेश सरकार बिजली निगम का निजीकरण करना चाहती है, जिससे बिजली महंगी होगी। बिजली कर्मचारियों की मांग है कि सरकार इन 23 सब डिवीजनों के निजीकरण के फैसले को वापस ले और कर्मचारियों के साथ बातचीत के जरिए सभी मुद्दों का हल निकाले।
निगम का दावा, कच्चे कर्मचारी नहीं होंगे हड़ताल में शामिल
जिले में एक हजार के करीब पक्के कर्मचारी हैं। पिछली बार हुई हड़ताल में पक्के कर्मचारियों के साथ कच्चे कर्मचारी भी शामिल हुए थे। इस दौरान जिले में कई जगह बिजली कटने के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। निगम अधिकारियों के अनुसार इस बार हड़ताल में कच्चे कर्मचारी शामिल नहीं होंगे। पिछली बार भी निगम द्वारा कच्चे कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल नहीं होने का दावा किया गया था, लेकिन उस हड़ताल में कच्चे कर्मचारी शामिल हुए थे।
बिजली कटी तो ये सेवाएं होंगी प्रभावित
हड़ताल के दौरान अगर बिजली कटी, तो जिले में पेयजल व पशुओं के लिए पीने के पानी की किल्लत हो सकती है। वहीं फिलहाल धान रोपाई का भी सीजन जोरों पर चल रहा है। खेतों की बिजली सप्लाई बाधित होने पर धान रोपाई का कार्य प्रभावित हो सकता है। हालांकि पेयजल सप्लाई को लेकर जन स्वास्थ्य विभाग पूरे प्रबंध करने का दावा कर रहा है। शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सप्लाई बिजली पर ही निर्भर है। जन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पेयजल सप्लाई के लिए बिजली कटने की स्थिति में जनरेटर की व्यवस्था की गई है।
60 लाख यूनिट है खपत
जिले में करीब पौने तीन लाख बिजली कनेक्शन उपभोक्ता हैं। फिलहाल जिले में प्रतिदिन 60 लाख यूनिट से ज्यादा की खपत हो रही है। इसमें सबसे ज्यादा कृषि में 25 लाख यूनिट से ज्यादा बिजली की खपत है। इससे साफ है कि बिजली की कितनी जरूरत है। यदि दो दिन तक बिजली कटती है तो, लोगों को गर्मी के मौसम में भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर नहीं पड़ेगा असर : सिविल सर्जन
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान बिजली कटने की स्थिति में सामान्य अस्पताल में भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन द्वारा पुख्ता तैयारियां करने का दावा किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया ने बताया कि इमरजेंसी, गायनी वार्ड व लेबर वार्ड में पहले से ही जनरेटर की व्यवस्था है। बाकी जहां भी जरूरत पड़ेगी, वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा।
नहीं होगी पेयजल सप्लाई बाधित
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान पेयजल सप्लाई बाधित नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए जनरेटर की व्यवस्था की गई है। जरूरत के अनुसार पीने के पानी के लिए टैंकर की भी व्यवस्था की जाएगी। शहर में गंदे पानी की निकासी के लिए विभाग के पास जनरेटर पहले से ही उपलब्ध हैं।
- बीपी शर्मा, एक्सईएन जन स्वास्थ्य विभाग
पूरी हैं तैयारियां
कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान बिजली सप्लाई बाधित नहीं होने दी जाएगी। अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था कर दी गई है। जिले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर दिए गए हैं और प्रत्येक बिजली घर पर पुलिस तैनात रहेगी। पंचायतें भी निगरानी रखेगी। अगर कोई किसी प्रकार की तोड़फोड़ करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हड़ताल में डिप्लोमा होल्डर जेई व कच्चे कर्मचारी शामिल नहीं हैं।
- दलजीत सिंह, एसई
बिजली निगम, जींद।