जींद। पिछले चार-पांच सालों से नरमा की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बन रही है।
बीमारियों के कारण नरमा फसल को काफी नुकसान हो रहा था। इससे फसल पर आया खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा था, लेकिन इस बार किसानों का नरमा फसल की तरफ रुझान बढ़ गया है। कपास की खेती का रकबा इस बार जिले में बढ़ गया है।
जिले में नरमा फसल की बुआई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब तक जिले में 30 हजार एकड़ के लगभग नरमा फसल की बुआई हो चुकी है जबकि पिछले साल 25 हजार एकड़ में नरमा की बिजाई हुई थी। कपास के बढ़े रकबे का सीधा असर धान के क्षेत्र पर पड़ेगा। धान की रोपाई का काम शुरू हो चुका है।
इस बार 3.95 लाख एकड़ में धान की फसल लगाने का अनुमान है। जिला के उचाना, जुलाना और नरवाना क्षेत्र में ही नरमा फसल उगाई जाती है।
इन क्षेत्रों में पानी की कमी है इसलिए नरमा फसल बिजी जाती है जबकि जींद, अलेवा, पिल्लूखेड़ा और सफीदों क्षेत्र में ज्यादात्तर धान की फसल की पैदावार ली जाती है। इस साल धान के रकबे में भी काफी कमी आएगी। हालांकि अभी धान की रोपाई का सीजन शुरू हो चुका है।