करोड़ों के प्रोजेक्ट वाले मिनी बाईपास का निर्माण लगभग पूरा हो गया है लेकिन समस्या को नजरअंदाज करने के कारण इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद ऐसी योजना बनाई कि मिनी बाईपास के बीच में आने वाले जींद-पानीपत और जींद-दिल्ली रेलवे क्रासिंग से होने वाली परेशानी को ही भूल गए। अब स्थिती यह है कि पीडब्ल्यूडी ने नक्शा तैयार कर आला अधिकारियों को भेज दिया है। उधर रेलवे का कहना है कि उनकी इस मामले में कोई योजना नहीं है। मिनी बाईपास का काम रेलवे क्रासिंग पर अंडर पास या ओवरब्रिज की कोई योजना नहीं होने के कारण लटका हुआ है। करोड़ों के इस प्रोजेक्ट के बनने के बाद भी शहर के लोग परेशान हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के दो वर्ष बाद भी शहर के लोगोें को मिनी बाईपास की सौगात नहंी मिल पाई है।
यह है पूरा मामला
जींद शहर के लोगों को जाम से निजात दिलवाने के लिए तीन जून 2012 को जींद की अनाज मंडी में हुई कांग्रेस की विकास रैली में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मिनी बाईपास की घोषणा की थी। शहर के सफीदों रोड से बस स्टैंड के पास से रजवाहे के ऊपर से होते हुए यह मिनी बाईपास भिवानी रोड पर निकाला गया है। 31 मार्च 2013 तक इस मिनी बाईपास के निर्माण को पूरा कर इसे शुरू किया जाना था लेकिन मिनी बाईपास के बीच में पड़ने वाली जींद-पानीपत और जींद-दिल्ली रेलवे लाइन पर अंडर पास या ओवरब्रिज नहीं बनाए जाने के कारण यह आज तक शुरू नहीं हो पाया है।
अन्ना टीम कई बार उठा चुकी है आवाज
24 नवंबर 2013 में अन्ना टीम को हर समाधान वेबसाइट के माध्यम से जानकारी मिली की मिनी बाईपास पर पड़ने वाली रेलवे लाइनों की क्रासिंग के लिए जींद प्रशासन ने कोई योजना ही तैयार नहीं की है।
26 नवंबर 2013 को अन्ना टीम के सदस्य उपायुक्त से मिले और रेलवे लाइनों पर अंडर पास बनाने की मांग की।
9 दिसंबर 2013 को उपायुक्त ने अंडर पास बनवाने के लिए इंजीनियर इन चीफ चंडीगढ़ को पत्र लिखा।
26 दिसंबर 2013 को अन्ना टीम को आरटीआई के माध्यम से पता चला कि अंडर पास बनाने के लिए विभाग के पास कोई अनुमति नहीं आई है।
30 दिसंबर 2013 को अन्ना टीम के सदस्य फिर उपायुक्त से मिले और अंडर पास बनवाने की मांग उठाई।
13 जनवरी 2014 को अन्ना टीम के सदस्यों ने इसी मामले में रेलवे के डीआरएम से मुलाकात की।
जनवरी 2014 को उपायुक्त ने अंडर पास बनाने के लिए अर्बन लोकल बॉडिज विभाग चंडीगढ़ को अंडर पास बनाने के बारे में अवगत करवाया।
30 जनवरी 2014 को अन्ना टीम के सदस्य अंडर पास बनाने को लेकर इंजीनियर इन चीफ महेश कुमार से मिले।
नहीं मिली जाम से निजात
जाम से शहर का बुरा हाल है। लोग जाम से बचने के लिए मिनी बाईपास का सहारा लेते हैं लेकिन यहां पर रेलवे क्रासिंग पार करने के लिए अंडर पास या ओवरब्रिज नहीं बनाया गया है। इसके चलते बाइक चालकों को रेलवे लाइन क्रासिंग पार करने में दिक्कत आती है। प्रशासन मिनी बाईपास के निर्माण के साथ-साथ अंडर पास का निर्माण भी कर देता तो शहर के लोगों को जाम से निजात मिल जाती। संदीप, भटनागर कालोनी निवासी
दुर्घटना होने का बना रहता है अंदेशा
जाम के झंझट से बचने के लिए मिनी बाईपास काफी शार्ट कट पड़ता है लेकिन यहां पर अंडर पास नहीं होने के कारण बाइक चालकों को रेलवे ट्रैक से ही बाइकों को निकालना पड़ता है। इससे यहां हर वक्त हादसा होने का अंदेशा बना रहता है। संदीप, राहगीर
डेंजर जोन बना रेलवे ट्रैक
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए मिनी बाईपास का शहर के लोगों को कोई लाभ नहीं मिला है। मिनी बाईपास का निर्माण तो कर दिया लेकिन रेलवे ट्रैक पर अंडर पास नहीं होने के कारण यह रेलवे लाइन मिनी बाईपास के रास्ते में बाधा बनी है। प्रशासन की लापरवाही के चलते रेलवे ट्रैक डैंजर जोन का रूप धारण कर चुका है। रोहतक रोड, भिवानी रोड पर जाने वाले ज्यादातर बाइक सवार जाम से बचने के लिए यही रास्ता अपनाते हैं। मोहित, राहगीर।
रेलवे ट्रैक पर अंडर पास बनवाने का नक्श तैयार करवाकर कई माह पहले ही विभाग के पास भेज दिया गया था। इसके बाद उनके पास विभाग की तरफ से कोई आदेश नहीं आए हैं। जैसे ही विभाग की तरफ से आदेश मिलेंगी, वैसे ही आगामी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
जयपाल मेहरा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, जींद
सिटी रेलवे स्टेशन से पानीपत लाइन पर किसी भी अंडर पास या ओवर ब्रिज का प्रस्ताव अभी रेलवे को नहीं मिला है। वहां पर क्या परियोजना चल रही है, इसकी जानकारी भी नहीं है। प्रस्ताव आने के बाद ही रेलवे अपना काम करेगा।
अजय माइकल, प्रवक्ता, रेलवे दिल्ली मंडल