करनाल के पोपड़ा गांव में लगी आग से जींद जिले के मोहमद खेड़ा और आलनजोगी खेड़ा के किसानों के अरमान झुलस गए हैं। वहीं सफीदों उपमंडल के रोझला गांव में भी आग से करीब पांच एकड़ गेहूं की फसल तबाह हो गई।
दर्जन भर किसानों के करीब 50 एकड़ गेहूं और करीब 100 एकड़ के फाने जल गए हैं। इनमें से अधिकतर किसान ऐसे हैं, जिन्होंने करनाल के पोपड़ा गांव में ठेके पर जमीन लेकर खेती की है।
वहीं करनाल जिले के पोपड़ा गांव में करीब 100 एकड़ फसल जल गई है। इसमें से भी अधिकतर किसान जींद जिले के आलनजोगी खेड़ा गांव के ही हैं। दरअसल जींद जिले के आलनजोगीखेड़ा गांव की सीमा करनाल जिले के पोपड़ा गांव के साथ लगती है।
बुधवार दोपहर पोपड़ा गांव की सीमा में अचानक आग लग गई, जो फैलती हुई जींद जिले के खेतों तक पहुंच गई। हालांकि जब तक करनाल प्रशासन सतर्क हो गया और करनाल क्षेत्र में फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुंच गई।
लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद जब तक आग पर काबू पाया जाता, काफी किसानों के अरमान जल चुके थे। किसान मांगेराम, पृथ्वी, पालाराम, रिशाल सिंह, रणबीर, प्रेम सिंह, महावीर, रामकिशन, भीम सिंह, महीपाल, दरबार सिंह, धर्म सिंह, सुरेंद्र ने बताया कि गेहूं की फसल में आग लगने से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
इससे उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने सरकार से पीड़ित किसानों को मुआवजा देने की गुहार लगाई है।
पिल्लूखेड़ा से एक माह पहले हटाई गई दमकल की गाड़ी
पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के लोगों के काफी प्रयासों के बावजूद क्षेत्र में दमकल विभाग की गाड़ी की व्यवस्था की गई थी, लेकिन लगभग एक माह पहले ही प्रशासन द्वारा पिल्लूखेड़ा से दमकल विभाग की गाड़ी को यहां से हटाकर जुलाना क्षेत्र में भेज दिया गया है।
इससे भी यहां के लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा रोष है। क्षेत्र में आगजनी की घटना होने पर जींद या सफीदों से दमकल विभाग की गाड़ी को बुलाना पड़ता है लेकिन जब तक दमकल विभाग की गाड़ी यहां पहुंचती है तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। ग्रामीणों ने दमकल विभाग की गाड़ी की व्यवस्था करने की मांग की है।
सफीदों: आग बुझा ही रहे थे कि दूसरे गांव से भी आई आग लगने की खबर
रोझला गांव के खेतों में आग लगने से पांच एकड़ गेहूं की फसल जल गई। घटना की सूचना दमकल विभाग की दी गई। सूचना दमकल विभाग को मिली तो दमकल विभाग के कर्मचारी गांव मुआना के खेतों मेें अवशेषों में लगी आग को काबू करने के बाद गांव से गुजर रही नहर से गाड़ी में पानी भर रहे थे। कर्मचारियों ने मुआना में समय पर आग को काबू करके कई गेहूं को बचाया।
जिसके बाद उन्होंने तुरंत रोझला दौड़ना पड़ा। जब कर्मचारी फायर ब्रिगेड गाड़ी को लेकर मौके पर पहुंचे तो तेज हवा चलने के कारण आग कई एकड़ में फैल चुकी थी। रोझला निवासी हरपाल की गेहूं की खड़ी चार एकड़ फसल जलकर राख हो चुकी थी। साथ ही नंद लाल की एक एकड़ व जयपाल की आधा एकड़ फसल भी जल गई।
तबाह हो गए किसान
अधिकतर किसानों ने पोपड़ा गांव में 40 हजार रुपये तक कीमत पर खेत ठेेके पर लिए थे। गेहूं की मुख्य फसल होती है और यही जल गई है। अब किसानों के पास कुछ नहीं बचा।
संतोष देवी, सरपंच आलनजोगी खेड़ा
कैसे बुझेगी आग, न गाड़ियां न स्टाफ
फायर ब्रिगेड के पास जिले में संसाधनों की काफी कमी है। विभाग के अधिकारी भी इस बात को स्वीकार करते हैं, लेकिन व्यवस्था है कि बदलने का नाम नहीं ले रही। फिलहाल 13 लाख की जनसंख्या पर महज 10 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां हैं। जींद मुख्यालय पर हालांकि छह गाड़ियां हैं, लेकिन इनके लिए महज 10 कर्मचारी हैं। जब कि एक शिफ्ट में छह चालकों व छह फायरमैन की जरूरत रहती है। वहीं पिल्लूखेड़ा ब्लॉक में फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं है। इसके अलावा नरवाना, उचाना, जुलाना तथा सफीदों में महज एक-एक फायर ब्रिगेड की गाड़ी है। फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार एक गाड़ी पर दस लोगों का स्टाफ चाहिए होता है, जो तीनों शिफ्टों में काम कर सके।
बिना छुट्टी लिए करते हैं काम
हां गाड़ियों और स्टाफ की दिक्कत है, लेकिन गर्मी के मौसम में सभी को तैनात रहना पड़ता है। जितना स्टाफ है, वह बिना छुट्टी लिए तैनात रहता है। अपने संसाधनों के हिसाब से हर वक्त हर स्थिति से निपटने के लिए तैनात रहते हैं।
डीके नंदा, जिला अग्निशमक अधिकारी।