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सावधान! सड़कों पर घूम रहे हैं यमदूत

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जींद-गोहाना सडक़ पर घूम रहा आवारा सांड। - फोटो : bureau
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शहर की सड़कों पर लावारिस जानवर मौत बनकर घूम रहे हैं। इससे आए दिन राहगीरों को जान से हाथ धोना पड़ता है। लावारिस पशुओं के कारण बार-बार हो रहे सड़क हादसों के बावजूद भी जिला प्रशासन कोई सबक नहीं ले रहा है। लावारिस पशुओं के कारण हुए सड़क हादसों में दर्जन भर से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और काफी लोग घायल हो गए चुके हैं। तब भी जिला प्रशासन ने अपने स्तर पर सड़क से जानवरों को हटाने के लिए कोई खास काम नहीं किया। हालांकि कुछ जानकारों की सींग और पीठ पर रिफ्लेक्टर लगाने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में यह समस्या और भी विकराल रूप धारण कर कती है लेगी क्योंकि ठंडी के साथ ही धुंध और कोहरा बढे़गा इससे हादसे बढ़ने की आशंका है। इतना ही नहीं कई वीआईपी लोग भी बेसहारा पशुओं की धींगा मस्ती का शिकार हो चुके हैं। शहर के लोगों को इस समस्या से निजात दिलवाने के लिए कई सामाजिक संगठन आवारा पशुओं के लिए आश्रय का प्रबंध करने के लिए आवाज उठा चुके हैं, लेकिन सामाजिक संगठनों की मुहिम के बावजूद भी नगर परिषद के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। जींद शहर में ही करीब छह हजार लावारिस पशु घूम रहे हैं। एक बार नगर परिषद ने इनकी निशानदेही भी शुरू की थी, लेकिन यह परियोजना भी अधर में ही लट गई। ऐसे में राहगीरों को हादसों का शिकार होना पड़ता है।

विधायक भी बन चुके हैं सांड़ों की धींगा-मस्ती का शिकार
शहर की सड़कों पर घूम रहे सांड़ों की धींगा-मस्ती का शिकार जींद के इनेलो विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा भी हो चुके हैं। सांड़ों की लड़ाई के दौरान चपेट में आने के कारण इनेलो विधायक को बहुत ज्यादा चोटें आई थी। काफी लंबे उपचार के बाद विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा इस चोट से उभर पाए थे।
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दर्जन भर से ज्यादा लोग बन चुके हैं काल का ग्रास
वर्ष 2010 में गाड़ी के सामने आवारा पशु आने के कारण हुए सड़क हादसे में डॉ. अश्विनी शर्मा की मौत हो गई थी। लगभग दो वर्ष पहले जींद-जुलाना रोड पर किनाना गांव के समीप आवारा पशुओं के कारण हुए सड़क हादसे में वकील कमल गोस्वामी की मौत हो गई थी। अढ़ाई वर्ष पहले आवारा पशुओं के कारण हुए सड़क हादसे में जाट संस्था के उपप्रधान मास्टर रण सिंह की मौत हो गई थी। हाउसिंग बोर्ड निवासी स्वतंत्रता सेनानी त्रिलोकी नाथ को सांड़ ने टक्कर मारकर घायल कर दिया था। लगभग डेढ़ वर्ष पहले शहर के बीड़बड़ा वन के पास गाय के साथ टैंपो की टक्कर में टैंपो चालक की मौत हो गई थी। वहीं देवीलाल ग्राउंड के पास भी सांड़ ने एक महिला को टक्कर मारकर घायल कर दिया। इसके अलावा शहर की सड़कों पर घूम रही बेसहारा गायों और सांड़ों की चपेट में आने के कारण कई अन्य घटनाएं भी घट चुकी हैं।

आगे और भी बढ़ सकते हैं हादसे
सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है और जल्द ही धुंध शुरू हो जाएगी। धुंध के कारण सड़क पर घूम रहे आवारा पशु नजर नहीं आते और इस कारण धूंध के मौसम में सड़क हादसों में बढ़ोतरी हो जाती है।   

अधर में लटका नंदीशाला बनाने का प्रोजेक्ट
सड़क हादसों का सबब बन रहे आवारा पशुओं से शहर के लोगों को वाहन चालकों को निजात दिलवाने के लिए सरकार द्वारा शहर में नंदीशाला बनाने की योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत नंदीशाला के निर्माण पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं।   योजना पर काम शुरू करवाने के लिए सरकार की तरफ से जिला प्रशासन को लगभग 25 लाख रुपये की ग्रांट भी जारी की जा चुकी है लेकिन अभी तक जिला प्रशासन नंदीशाला के लिए जमीन की तलाश भी नहीं कर पाया है। जिला प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण शहर में नंदीशाला बनाने का प्रोजेक्ट भी अधर में लटक गया है।

समस्या के समाधान के लिए खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
शहर के लोगों को आवारा पशुओं के कारण हो रही परेशानी से निजात दिलवाने के लिए अन्ना टीम सहित कई अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार मुहिम चलाई जा चुकी है, लेकिन जिला प्रशासन पर इन मुहिम का कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद अन्ना टीम द्वारा इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय लोक अदालत में याचिका दायर की गई थी और लोक अदालत ने भी जिला प्रशासन को इस समस्या के समाधान के लिए आदेश जारी किए थे, लेकिन अदालत के आदेशों पर भी प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की तो अन्ना टीम ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभी मामला हाईकोर्ट में पेंडिंग हैं।
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- हितेश हिंदुस्तानी, सदस्य
 अन्ना टीम


जमीन नहीं मिलने के कारण नंदीशाला बनाने का प्रोजेक्ट रुका था। शहर की एक गोशाला द्वारा नंदीशाला के लिए पांच एकड़ जमीन दी जानी थी। अब गोशाला द्वारा एक दिसंबर तक जिला प्रशासन को जमीन मुहैया करवा दी जाएगी। इसके बाद नंदीशाला बनाने का काम शुरू करवा दिया जाएगा।
- विनय सिंह, डीसी, जींद

 
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