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वाहन पासिंग पर दलालों का शिकंजा

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हैबतपुर रोड पर पासिंग के लिए लगी वाहनों की लंबी लाइन। - फोटो : bureau
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राज्य परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) के जींद कार्यालय पर दलालों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। आरटीए के जींद कार्यालय में वाहनों की पासिंग का पूरा कामकाज दलालों के शिकंजे में है। बिना दलाल के यहां वाहन पास करवाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है, लेकिन यदि वाहन चालक दलाल की शरण में चला जाता है तो वाहन पासिंग का काम महज चंद मिनटों में हो जाता है। यदि कोई वाहन चालक सीधे वाहनों की पासिंग करवाना चाहता है तो आरटीए कार्यालय के अधिकारी कागजों में बार-बार कमियां निकाल कर वाहन मालिक को इस कदर परेशान कर देते हैं कि वह मजबूरी में दलाल के चुंगल में फंस जाता है। इस प्रकार वाहन पासिंग के नाम पर दलाल वाहन चालकों से मोटी रकम ऐंठते हैं, लेकिन आरटीए कार्यालय के अधिकारी मौन बनकर यह सब देखते रहते हैं। आरटीए कार्यालय के अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ कर दलाल वाहन चालकों की जेबें तरास रहे हैं। वहीं गाड़ियों में स्पीड गवर्नर लगाने के नाम पर भी वाहन चालकों से मोटी रकम वसूली जाती है।
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स्पीड गवर्नर व फीटमैप के नाम पर फर्जीवाड़ा
वाहनों की स्पीड को नियंत्रित करने के लिए वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाए जाते हैं। वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के नाम पर दलालों द्वारा वाहन मालिकों से 10 से 15 हजार रुपये की राशि ली जाती है। जबकि बाजार में इस उपकरण की कीमत महज 1500 से दो हजार के करीब है। इतना ही नहीं इस उपकरण के एक वर्ष पूरा होने के बाद स्पीड गवर्नर की फीटमेप के नाम पर वाहन चालकों से फीटमेप प्रमाण पत्र बनाने के लिए एक हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। जबकि फीटमेप प्रमाण पत्र बनाते समय स्पीड गवर्नर को चेक तक नहीं किया जाता है। बिना स्पीड गवर्नर चेक किए ही एक साधारण कागज पर वाहन का नंबर व मालिक का नाम भरकर वाहन चालक को थमा दिया जाता है। इस प्रकार दलालों द्वारा आरटीए कार्यालय के अधिकारियों के साथ मिलकर वाहन मालिकों से रुपये वसूलने के लिए फीटमेप प्रमाण पत्र को आड़ बनाया गया है।


यहां पर बिना दलाल के गाड़ी पास करवाना आसान काम नहीं है। यदि गाड़ी को सीधे पास करवाने के लिए जाते हैं तो अधिकारी हर बार कागजातों में कुछ न कुछ कमी निकाल कर वापस भेज देते हैं। छोटे से इस काम के लिए अधिकारियों द्वारा काफी परेशान किया जाता है। इसलिए इस झंझट से बचने के लिए सीधे दलाल के पास चले जाते हैं। एक वाहन की पासिंग के दलाल द्वारा लगभग दो हजार रुपये लिए जाते हैं। दलाल के माध्यम से गाड़ी पास करवाना बहुत ही आसान काम है। दलाल बिना किसी झंझट के आसानी से गाड़ी पास करवा देते हैं।
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- अशोक, गाड़ी चालक

300 के करीब लगती है सरकारी फीस, दलाल लेते हैं दो हजार
यदि कोई वाहन मालिक अपने वाहन की स्वयं पासिंग करवाना चाहे तो वाहन पासिंग पर उसका खर्च लगभग 400 रुपये आता है। इसमें 300 रुपये सरकारी फीस और 100 रुपये फाइल तैयार करने पर खर्च होते हैं। जबकि दलाल के माध्यम से गाड़ी पास करवाने पर एक वाहन मालिक को दो हजार के करीब रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

यदि किसी वाहन मालिक को इस तरह की परेशानी है तो वह सीधे मुझसे इसकी शिकायत कर सकता है। मैं सोमवार को खुद मौके पर पहुंचकर इस मामले की जांच करूंगा। यदि कोई व्यक्ति इस तरह का काम करता पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जाएगी।
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- बीर सिंह, आरटीए सचिव
राज्य परिवहन प्राधिकरण, जींद।
 
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