नौगामा खाप की पंचायत में पिछले दिनों हुए अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आंदोलन में हिस्सा नहीं लेने को लेकर खूब हंगामा हुआ। खाप के लोगों ने अपने खाप नेताओं से गिले-शिकवे किए। रामराये गांव में दरिया सिंह ईंटल की अध्यक्षता में हुई खाप की पंचायत में खाप नेताओं के आंदोलन के दौरान सरकार के प्रतिनिनिधियों से मिलने और आंदोलन को लेकर की गई बयानबाजी से खाप के लोग खफा नजर आए। पंचायत में फैसला लिया गया कि भविष्य में जब भी जाट आरक्षण के लिए कोई संघर्ष होगा, नौगामा खाप एकजुट होकर उसमें हिस्सा लेगी।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला प्रधान कैप्टन भूपेंद्र सिंह ने नौगामा खाप के प्रधान कुलदीप पर आरोप लगाया कि खटकड़ गांव में चले धरने में वे शामिल नहीं हुए, जबकि नौगामा खाप के लोग इस धरने का समर्थन कर रहे थे। फरवरी माह में आंदोलन के समय नौगामा खाप ने कुलदीप को खाप की तरफ से नेतृत्व सौंपते हुए प्रधान बनाया था, तो वे अब इस लड़ाई से पीछे क्यों हटे। वहीं डॉ. दलबीर बीबीपुर, सुरेश बहबलपुर व अन्य लोगों ने प्रधान कुलदीप व पूर्व प्रधान बीरभान ढुल पर जाट आरक्षण को लेकर सार्वजनिक तौर पर गलत बयानबाजी करने और खाप चौधरियों को सरकारी एजेंट बनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब खाप चौधरी ये कह रहे थे कि यह आंदोलन खापों का नहीं, यशपाल मलिक गुट का है, तो खाप चौधरी सरकार के साथ बैठक में क्यों गए। फरवरी माह में खापों द्वारा आंदोलन शुरू किया गया था, तो अब खाप चौधरियों को पीछे नहीं हटना चाहिए। इस अवसर पर नौगामा खाप के प्रवक्ता महेंद्र सिंह जागलान, तिजेंद्र ढुल, नफे सिंह, दलबीर रेढ़ू समेत नौगामा खाप के अंतर्गत आने वाले गांवों के लोग मौजूद रहे।
खाप के सवाल और प्रधान के जवाब
खाप के लोगों द्वारा किए गए सवालों का जवाब देते हुए प्रधान कुलदीप ने कहा कि उन्होंने कभी भी सार्वजनिक तौर पर जाट आरक्षण व धरने के संबंध में कभी कोई बयान नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने जो बैठक बुलाई थी, उसमें वे शामिल जरूर हुए थे। बैठक के बाद जो बयानबाजी हुई, उस समय वे वहां से निकल चुके थे, दूसरी खापों के लोगों ने जो बयान दिए, उनसे उनका कुछ लेना-देना नहीं है। नौगामा खाप के लोगों का जो फैसला होगा, वे उनके साथ हैं। जाट आरक्षण के लिए जो भी संघर्ष होगा, उसमें नौगामा एकजुट होकर शामिल होगी।
खापों ने कभी धरने उठाने को नहीं कहा : बीरभान
पूर्व प्रधान बीरभान ने कहा कि यशपाल मलिक गुट के आंदोलन से सरकार नहीं झुकी है। सरकार के साथ बातचीत में खापों ने मांगें मनवाने के लिए दबाव बनाया। साथ ही कभी भी खापों ने धरने उठाने के लिए नहीं कहा। सरकार ने खाप नेताओं के साथ हुई बातचीत में सारी बातें मान ली थी। यशपाल मलिक गुट सरकार के साथ बातचीत करने क्यों गया।