जींद। शाहाबाद से नरवाना आकर कृष्ण बेदी ने पहली बार कमल खिलाने में कामयाब रहे। नरवाना में भी यह पहली बार हुआ कि यहां कमल खिला है। इससे पहले यह सीट इनेलो के पास रही थी। यहां 2019 में जजपा के टिकट पर रामनिवास सुरजाखेड़ा विधायक बने थे। दुष्कर्म का मामला दर्ज होने के कारण उनको टिकट नहीं मिला। वह इस मामले में निर्दोष पाए गए, लेकिन टिकट हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाए। भाजपा पहले ही यहां से कृष्ण बेदी को टिकट देना चाहती थी।
नरवाना विधानसभा सीट पर हरियाणा बनने के बाद पहली बार 1967 में चुनाव हुआ था। इस चुनाव में आरपीआई के शमशेर सिंह सुरजेवाला जीते थे। यहां से शमशेर सिंह सुरजेवाला चार बार विधायक बने। वहीं उनके बेटे रणदीप सिंह सुरजेवाला भी यहां से दो बार कांग्रेस को जिताने में कामयाब रहे। इस सीट पर आखिरी बार 2005 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद यह सीट आरक्षित कर दी गई। 2009 व 2014 में इस सीट पर इनेलो के पिरथी सिंह जीते थे। इस समय पिरथी सिंह भाजपा में शामिल हो गए थे। 2019 में यहां से जजपा के टिकट पर रामनिवास सुरजाखेड़ा ने जीत दर्ज की थी। अब कृष्ण बेदी यहां से जीत हासिल करने में कामयाब रहे हैं। कृष्ण बेदी ने नरवाना विधानसभा सीट से कांग्रेस के सतबीर दबलैण को 11499 वोटों से हराया। यहां से कृष्ण बेदी को 59474 वोट मिले तो सतबीर दबलैण को 47975 वोट मिले।