इंसाफ जनसभा में समर्थकों ने राज्यसभा सांसद बीरेंद्र सिंह को साफ-साफ शब्दों में पार्टी छोड़ने की सलाह दी। जनसभा में सांसद ने कहा कि पहले उनके हाथ मजबूत करें। अपने 30 मिनट के भाषण में उन्होंने पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल के विवाद का हवाला देकर कहा कि कार्यकर्ता बदल जाते हैं। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने हमेशा सच्चाई और ईमानदारी की राजनीति की है।
यही कारण है कि उन्हें पार्टी आलाकमान की उपेक्षा झेलनी पड़ रही है। मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यदि ‘मैं भी पूंछ हिलाता, जुकर म्हारे आला हलान लाग रया है’ तो मुझे भी सम्मान मिलता।
उन्होंने कहा कि अब आईजी शमशेर सिंह (जुलाना के पूर्व विधायक), मांगेराम गुप्ता (पूर्व मंत्री), बच्चन सिंह (पूर्व मंत्री) और छोटा-बड़ा सुरजेवाला नहीं चलेगा। बीरेंद्र सिंह ने एक पूर्व मंत्री का नाम लेकर कहा कि वह शराब की भट्ठियां चलाता है। जिस व्यक्ति ने कांग्रेस के उम्मीदवार को हराने का काम किया, मुख्यमंत्री ने उसके बेटे को बगावत का तोहफा दे दिया।
कार्यकर्ताओं को भी सुनाई खरी-खरी
बीरेंद्र सिंह ने जनसभा में कार्यकर्ताओं को भी नहीं बख्शा और उनको भी खरी-खरी सुना डाली। उन्होंने कहा कि जींद के कार्यकर्ता सम्मेलन में जाने पर भी साथियों के दो मन थे। कुछ लोग वहां मौजूद पुलिस से डर रहे थे, लेकिन कुछ हर हाल में वहां जाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि हम जिले की नहीं अपने स्वार्थ की सोचते हैं। अपने काम करवाने के लिए रिश्तेदारी ढूंढ लेते हैं। लोगों को चाहिए नौकरी, इसके बाद अच्छी जगह। एमएलए को चाहिए सीएलयू। हमारी आदत खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि जींद के लोगों में कमी है।
जब मुकेश अंबानी से भिड़े बीरेंद्र सिंह
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मुकेश अंबानी को 25 हजार एकड़ जमीन एसईजेड के नाम पर देना चाहती थी, लेकिन वे इसका विरोध कर रहे थे। इस पर मुकेश अंबानी ने उनसे मुलाकात की। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि हरियाणा में यदि दो फुट जमीन भी इधर-उधर हो जाए तो लोग भाई को गोली मार देते हैं, फिर इतनी जमीन कैसे देंगे। चार साल बाद भी अंबानी को महज चार हजार एकड़ जमीन मिल पाई है।
फिर अलापा जींद के पिछड़ेपन का राग
बीरेंद्र सिंह ने जनसभा में एक बार फिर जींद के पिछड़ेपन का राग अलापा। उन्होंने कहा कि दस साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने जींद में विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने सरकार के अंतिम दिनों में फिर ऐसी ही घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यदि बीरेंद्र सिंह मुख्यमंत्री बनता तो उसी समय विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य शुरू करवाता। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर भेदभाव, ‘ठग्गी हुई है।’ इस मौके पर सोमबीर पहलवान, स्वामी कर्मपाल, विनोद सिंगला, विरेंद्र घोघड़ियां सहित कई नेता मौजूद रहे।