भारतीय किसान यूनियन ने मांगों को लेकर रामराये गांव स्थित बस स्टैंड पर प्रदर्शन किया। इस दौरान आधा घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही। सूचना मिलते ही तहसीलदार मनोज कुमार किसानों के बीच पहुंचे और उनसे ज्ञापन लिया। इस दौरान किसान नेताओं तथा तहसीलदार के बीच काफी देर तक नोकझोंक की स्थिति बनी रही। बाद में तहसीलदार ज्ञापन लेकर लौट गए। किसानों की मुख्य मांग थी कि विधायकों ने अपना वेतन बढ़ा लिया, लेकिन बुजुर्गों की पेंशन नहीं बढ़ाया। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की पेंशन 5100 रुपये की जाए या फिर विधायकों का बढ़ा हुआ वेतन वापस लिया जाए।
भाकियू के प्रांतीय उपाध्यक्ष बिल्लू खांडा ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। आज किसान कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है, लेकिन सरकार उनका आर्थिक स्तर ऊंचा उठाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि विधायकों ने अपना वेतन एकदम बढ़ा लिया, इसका किसी ने विरोध नहीं किया, लेकिन आज बुढ़ापा पेंशन नहीं बढ़ाई गई। पर्यावरण प्रदूषण के नाम पर किसानों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि इसमें किसानों का कोई रोल नहीं हैं। किसानों को जेल भेजा जा रहा है। किसानों के खिलाफ दायर सभी मामले वापस ले।
किसानों ने गन्ने के भाव पर तुरंत 100 रुपये बोनस देने की मांग की। घोषणा पत्र में किए गए वादों को भाजपा लागू करे। ट्यूबवेल कनेक्शन का आवेदन करने वालों को तुरंत कनेक्शन मिले। किसानों की समस्याओं को दूर किया जाय। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत तुरंत मुआवजा दिया जाए। खाद व बीज के बढ़ाए गए रेट वापस लिया जाय। किसान नेताओं ने कहा कि यदि सभी मांगें जल्द पूरी नहीं की गई तो भाकियू आंदोलन करने पर मजबूर होगी। इस मौके पर काफी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रही। किसानों को जिला प्रधान बारूराम, प्रकाश भैण, उपप्रधान रामफल भैण, महेंद्र घिमाना, प्रदीप, छज्जूराम कंडेला, रामफल कंडेला, रामराजी पोकरी खेड़ी, रामदिया राजपुरा, सुरेंद्र उचाना, रणधीर पोकरी खेड़ी, सूरजमल ईंटल कलां, संजय फौजी नाड़ा, रामफल मनोहरपुर, रामफल गुलकनी, संदीप नाड़ा ने भी संबोधित किया।
मेरे स्तर की नहीं यह समस्या
जिस समय किसानों का ज्ञापन लेने के लिए तहसीलदार मनोज कुमार पहुंचे तो किसानों ने उनके सामने विधायकों की बढ़ी हुई पेंशन वापस लेने की मांग की। इस पर तहसीलदार ने कहा कि यह उनके अधिकार क्षेत्र की बात नहीं है। आपके मांग पत्र को सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा। इसी बात को लेकर किसानों तथा तहसीलदार के बीच काफी देर बहस होती रही। तहसीलदार किसानों को समझाते रहे, लेकिन किसान अपनी बात पर अड़े रहे। किसान यह कहते रहे कि विधायकों को अपनी बढ़ी पेंशन वापस लेनी चाहिए। काफी देर बहस के बाद किसानों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।