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Jind News: मकान में भूखे मरने से अच्छा बाहर गोली खाकर मरें

Sat, 22 Apr 2023 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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जींद। सूडान में सेना और अर्धसैनिक बल के बीच चल रहे गृह युद्ध में फंसे जींद के परिवार को भारतीय दूतावास का कोई सहयोग नहीं मिल पाया है। पिछले छह दिनों से मकान से बाहर निकलने की उम्मीद लगाए बैठे परिवार को शुक्रवार शाम तक भी भारतीय दूतावास की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इस पर परिवार मायूस नहीं हुआ बल्कि शुक्रवार सुबह वह अपने मकान से बाहर निकला और भारतीय परिवारों की मदद से खूर्तम शहर से बस में 800 किलोमीटर दूर ओल्ड सूडान के रवाना हो गया। यह सब अमन गुप्ता ने शनिवार सुबह अपने पिता वीरेंद्र गुप्ता के साथ दो मिनट फोन पर हुई बात के दौरान बताया।
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भारतीय दूतावास ने सूडान में रहने वाले भारत के परिवारों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए 20 बसें भेजने का आश्वासन दिया था। दूतावास ने यह भी कहा था कि अपने पहचान पत्र और अन्य कागजातों की कॉपी करवाकर रखना, लेकिन दूतावास भारतीय परिवारों को सुरक्षित जगह भेजने के लिए एक भी बस मुहैया नहीं करवा पाया। इसको लेकर सूडान के खार्तूम में रह रहे भारतीय परिवारों ने ओल्ड सूडान में रह रहे लोगों की मदद से वहां से एक बस मुहैया करवाई और ओल्ड सूडान के लिए रवाना हो गए। वह यही मान रहे हैं कि जीवन का यह आखिरी जोखिम भरा फैसला है। उन सभी ने अपने-अपने मोबाइल फोन बंद किए हुए हैं और छिपते-छिपाते सूडान की राजधानी खार्तूम से दोपहर तक निकल गए थे। उम्मीद है सभी सकुशल पहुंच जाएंगे।
सूडान में फंसे अमन गुप्ता ने मोबाइल फोन पर बातचीत में बताया कि भारतीय दूतावास द्वारा बार-बार कागजातों की कॉपी मांगी जा रही है, जबकि वहां न तो प्रिंटर है न बिजली है। दूतावास ने 20 बसें मुहैया करवाने को कहा था, लेकिन एक भी मुहैया नहीं हुई। मकान में खाने को कुछ नहीं बचा था और रुपये भी कम थे। इसको लेकर उन्होंने खुद ही एक बस का प्रबंध कर 800 किमी. दूर ओल्ड सूडान की तरफ निकल लिए हैं। उनको यह जिंदगी का सबसे जोखिम भरा फैसला है। मकान में भूखे मरने से अच्छा है कि बाहर गोली से ही मर जाएं।
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बंदूक के बल पर सबकुछ लूट लिया
सूडान में चल रहे गृह युद्ध के दौरान आम नागरिकों से लूटपाट की घटनाएं भी हो रही हैं। बाहर कोई भी दिखाई दे तो उससे मोबाइल फोन, नकदी, जेवरात, कपड़े लूटे जा रहे हैं। वहां कई भारतीय परिवारों के साथ भी लूटपाट की घटनाएं हुई हैं। कई परिवारों के पास न पैसा बचा है और न ही खाने-पीने का सामान है। बस वहां एक-दूसरे भारतीय परिवारों का ही सहयोग है। जिस बस में ओल्ड सूडान जा रहे हैं, उसमें सभी भारतीय परिवार के लोग हैं।
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