जींद। जिले की मंडी में बाजरे की सरकारी खरीद न होने से किसानों को सरकारी मूल्य से कम में बाजरा बेचना पड़ा। प्राइवेट एजेंसियों ने शुक्रवार को 1650 से 1850 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बाजरा बिका जबकि सरकारी भाव 2020 रुपये प्रति क्विंटल है। इस समस्या से किसान परेशान हैं। उधर अनाज मंडियों में अब तक 54440 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है।
मंडी में बाजरे की खरीद बंद होने से किसानों को पहले ही दिन कम भाव में बाजरे को बेचना पड़ा। जिसके चलते शुक्रवार को 435 क्विंटल बाजरे की खरीद की गई। यह खरीद प्राइवेट एजेंसियों ने 1650 रुपये से 1850 रुपये प्रति क्विंटल तक की जो कि न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम बिका। अब तक बाजरे को मंडी में हेफेड द्वारा खरीदा जा रहा था। भाव कम मिलने से किसान काफी परेशान नजर आए। उनका कहना है कि सरकार को इस संबंध में सोचना चाहिए ताकि किसान को सरकारी मूल्य मिल सके।
उधर विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार अलेवा की अनाज मंडी में अब तक 2278 मीट्रिक टन, धमतान की अनाज मंडी में 5227 मीट्रिक टन, धनौरी में 986 मीट्रिक टन, गढ़ी में 3540 मीट्रिक टन, जींद में 362 मीट्रिक टन, नंगूरा में 529 मीट्रिक टन, नरवाना में 30961 मीट्रिक टन, पिल्लूखेड़ा में 3245 मीट्रिक टन, सफीदों में 2653 मीट्रिक टन, उचाना में 2506 मीट्रिक टन, छातर में 7 मीट्रिक टन , खरल में 840 मिट्रिक टन, मंगलपुर में 1306 मीट्रिक टन धान की आवक व खरीद की जा चुकी है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा 28742 मीट्रिक टन, हैफेड द्वारा 20381 मीट्रिक टन, एफसीआई द्वारा 1671 मीट्रिक टन तथा हरियाणा वेयर हाउस कॉर्पोरेशन द्वारा 3646 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है।
इसको लेकर मंडी प्रशासन ने खरीद एजेसिंयों को निर्देश दिए गए कि वह खरीदे गए धान का उठान कार्य भी साथ-साथ करवाते रहें, ताकि किसानों को मंडियों में फसल उतराने के कार्य में कोई परेशानी न हो। जिला की अनाज मंडियों में कर देर सांय तक 773 मीट्रिक टन बाजरे की खरीद हो चुकी है। फिलहाल अनाज मंडियों में ग्रेड-ए धान की आवक हुई। धीरे-धीरे फसल कटाई का कार्य जोर पकड़ेगा, मंडियों में फसलों की आवक में तेजी से वृद्घि होगी। मंडी में किसानों की सुरक्षा के लिए पुलिस विभाग के अधिकारियों ने गश्त बढ़ाने के निर्देश पीसीआर को दिए हैं।
मंडी में धान व बाजरे की खरीद को लेकर किसानों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। वीरवार तक मंडी में हेफेड बाजरे की खरीद कर रहा था। शुक्रवार को हेफेड ने बाजरे की खरीद नहीं की। जिसके चलते किसानों ने बाजरे को निजी एजेंसियों को बेचना पड़ा। मंडियों में फसल सूखाकर लाएं, ताकि फसल की बिक्री तुरंत हो सके।
-संजीव कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी