संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। मांगों को लेकर आंदोलनरत आशा कार्यकर्ताओं ने रविवार को पिल्लूखेड़ा ब्लॉक के मालसरी खेड़ा गांव में कैंडल मार्च निकाला। इसमें आशा कार्यकर्ताओं के साथ किसान, मजदूर, नौजवान, महिलाओं ने हिस्सा लिया। मार्च में सभी ने भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
मार्च में शामिल सीटू नेता राधेश्याम हाट, राजेश भंभेवा, नजीर ने बताया कि गांव में आशा कार्यकर्ताओं को जबरदस्त समर्थन मिला। आशा कार्यकर्ता परिवार को छोड़कर गर्भवती महिलाओं, जच्चे-बच्चे की व अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों को चिकित्सा सेवा दिलाने का काम करती हैं। कोरोना काल में भी उन्होंने बेहतर कार्य किया। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार आशा कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुन रही है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की कि सरकार को उनकी मांगों का समाधान करे। आशा कार्यकर्ता संतोष व राजबाला ने बताया कि सरकार के साथ उनके प्रतिनिधिमंडल की तीन दौर की वार्ता हो चुकी है। राज्य की 20 हजार आशा वर्कर्स मजबूती के साथ हड़ताल पर डटी हैं। यह सरकार को तय करना है कि वह आंदोलन को कितना लंबा खींचना चाहती हैं। फिलहाल हड़ताल 10 अक्तूबर तक बढ़ा दी गई है। आठ अक्तूबर को प्रदेश की सभी आशा वर्कर्स करनाल में ललकार रैली में शामिल होंगी और जब तक मांगों का नोटिफिकेशन जारी नहीं होता तब तक गांव और शहर की काॅलोनियों में सरकार के खिलाफ मशाल जुलूस निकालेंगी। मुख्यमंत्री बैठक में मांगों पर सहमति बनाकर उनका नोटिफिकेशन करें ताकि आशा कार्यकर्ता काम पर लौट सकें। कैंडिल मार्च में शमशेर गांगोली, कृष्ण भंभेवा, आशा वर्कर राजबाला, कृष्णा, सुषमा, आशा, रेखा, उषा, सुमन, सुशीला, रीना, माया, रेणू, मनीषा, सुमन मौजूद थीं।