संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। आशा वर्कर यूनियन हरियाणा के आह्वान पर आशा कार्यकर्ताओं की तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल मंगलवार से शुरु हो गई। आशा कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को लघु सचिवालय के बाहर धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में लघु सचिवालय में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।
धरने को संबोधित करते हुए यूनियन की जिला प्रधान नीलम, सचिव राजबाला, कोषाध्यक्ष जगवंती ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार लगातार आशाओं का शोषण कर रही है। वर्ष 2018 में आशाओं के साथ किए गए समझौतों को लागू नहीं किया जा रहा और ऊपर से हर रोज सरकार नए-नए काम ऑनलाइन करने के लिए थोप रही है। इसके बदले में सरकार आशाओं को किसी भी प्रकार का मेहनताना नहीं देती बल्कि विभाग के उच्च अधिकारी एवं सरकार की ओर से आशाओं को धमकियां दी जा रही हैं। हालात तो यह है कि आज तक किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य केंद्रों व जिला अस्पतालों पर कोई सुविधा आशाओं को मुहैया नहीं करवाई गई। आशाओं के लिए बैठने की जगह तो दूर, उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों में विभाग का काम करने मीटिंग आदि के लिए जगह तक मुहैया नहीं करवाई गई है और ना ही आशाओं को न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है। जिस कारण आशा वर्करों में सरकार के प्रति भारी रोष है। इसलिए आशा वर्कर यूनियन हरियाणा ने सरकार की वादाखिलाफी एवं अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि हड़ताल में जिला भर की सभी आशाएं बढ़चढ़ कर भाग लेंगी।
ये हैं आशा वर्करों की मांगें
वर्ष 2018 का समझौता लागू करवाया जाए। आशा वर्करों को कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। सरकार की तरफ से जरूरत का सभी तरह का सामान उपलब्ध करवाया जाए। न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये किया जाए। ऑनलाइन काम का मेहनताना दिया जाए। आशा वर्करों का सभी तरह का शोषण बंद हो। स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों में आशा वर्करों के लिए बैठने का प्रबंध, अलमारी, कुर्सियों का प्रबंध किया जाए।