संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। आशा वर्करां की हड़ताल बुधवार को लघु सचिवालय के बाहर 16वें दिन भी जारी रहा। बुधवार को धरने की अध्यक्षता कमला खरल ने की जबकि संचालन शीला अमरगढ़ ने किया। आशा वर्करों को संबोधित करते हुए जिला प्रधान नीलम ने कहा कि आशा वर्करों की हड़ताल आठ अगस्त से जारी है लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ने कोई सुध नहीं ली। अपनी आवाज को प्रदेश सरकार तक पहुंचाने के लिए विधानसभा का घेराव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आशा वर्करों का लगातार शोषण कर रही है। पिछली भाजपा सरकार ने आशा वर्करों के आंदोलन के दौरान वर्ष 2018 में समझौतों किया था, इसका आज तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। दूसरी ओर आशा वर्करों पर काम का लगातार दबाव बनाया जा रहा है और हर रोज सरकार द्वारा नए-नए काम ऑनलाइन करने के लिए थौंपे जा रहे हैं। इसके बदले में सरकार आशाओं को किसी भी प्रकार का कोई मेहनताना नहीं देती। उल्टा विभाग के उच्च अधिकारियों एवं सरकार द्वारा आशा वर्करों को तरह-तरह की धमकियां दी जा रही हैं। हालात तो यह है कि आज तक किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य केंद्रों व जिला अस्पतालों पर कोई सुविधा आशा वर्करों को मुहैया नहीं करवाई गई। आशा वर्करों के लिए बैठने की जगह तो दूर, उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों में विभाग का काम करने मीटिंग आदि के लिए जगह तक मुहैया नहीं करवाई गई है। ना ही आशा वर्करों को न्यूनतम वेतन दिया जा रहा, जिस कारण आशा वर्करों में सरकार के प्रति भारी रोष है। इस अवसर पर मंजू, शीला, संतोष, बाला, सुमन, कमेलश, पूजा, रोशनी, मंजू, राजकुमारी, पूनम, महेंद्रो, दयावंती, मीना मौजूद थी।