दिल्ली केंद्र सरकार की नहीं, देश के किसानों की है। आजादी के आंदोलन में भी किसानों ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद केंद्र सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। यह बात वीरवार को उचाना विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दूसरे दिन डूमरखां कलां गांव में इनेलो के प्रधान महासचिव अभय चौटाला ने कही।
उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन मजबूत हो, इसके लिए वह लोगों सेे मिलने आए हैं। चार महीने से अधिक समय से किसान आंदोलन चल रहा है पर सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है। अभय चौटाला ने कहा कि किसान आंदोलन पर सरकार ने तरह-तरह के आरोप लगाए। कभी किसानों को खालिस्तानी, अलगाववादी तो कभी कहा कि यह आंदोलन केवल सिखों का है। सरकार में बैठे नेता जैसे-जैसे आरोप लगाते रहे और आंदोलन कमजोर होने की बजाय बढ़ता गया। आज आंदोलन ने इतना बड़ा रूप ले लिया है कि यह हिंदुस्तान का नहीं बल्कि पूरी दुनिया का आंदोलन बन गया है। अभय चौटाला ने डूमरखा कलां, खुर्द व करसिंधु सहित 10 गांवों में सभाओं में लोगों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने कुछ फैसले लिए हैं। जिसमें 10 अप्रैल को केएमपी बंद भी है। अभय ने कहा कि दिल्ली केंद्र सरकार की थोड़ी है, दिल्ली तो किसानों की है। 80 फीसदी जनता जो गांव में रहती थी उन लोगों ने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। वह आजादी की लड़ाई नहीं लड़ते तो देश आजाद नहीं होता, फिर तो देश गुलाम रहता। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल सरकार को बने हो चुके हैं। वादे पूरा करना छोड़कर सरकार लोगों को उकसा रही है। किसान आंदोलन कैसे मजबूत हो, इसके लिए वह गांव-गांव जाएंगे। आज कोई पंच पद से इस्तीफा नहीं दे सकता, लेकिन किसानों के लिए विधायक पद से इस्तीफा देकर आज वह किसानों के बीच हैं। इस मौके पर रामफल कुंडू, बलराज नगूरां, सत्ता डूमरखां, कर्ण सिंह अलेवा, राजा डूमरखां, जीवन छापड़ा, वकील करसिंधु, चांदी करसिंधु, वीरभान झील, महाबीर दरोली, सुमित्रा देवी मौजूद रहे।
बिना नाम लिए उपमुख्यमंत्री पर साधा निशाना
उन्होंने नाम लिए बिना उचाना कलां विधानसभा क्षेत्र से विधायक व प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के बारे में कहा कि ऐसे लोग सत्ता में बैठे हैं, जिन्होंने बड़े-बड़े वादे किए थे। बुजुर्गों को 5100 रुपये पेंशन, किसानों का कर्ज माफ, बेरोजगारी भत्ता 11 हजार रुपये देने की बात कही थी मगर कोई वादा पूरा नहीं किया। यह लोग कहते थे कि भाजपा को जमुना पार कराएंगे। भाजपा को हत्यारों की सरकार बताते थे। जो वोट लोगों ने दिया था उसकी इज्जत रखते हुए भाजपा को सत्ता से बाहर करना चाहिए था। भाजपा को सत्ता से बाहर करने की बजाय उसको मजबूत करने में लग गए हैं।