प्रशासन द्वारा तीन दिन से चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान पर करीब ढाई हजार लावारिस पशु भारी पड़ रहे हैं। इन पशुओं के कारण सरकारी, गैर सरकारी संगठनों, शिक्षण संस्थानों के अलावा अन्य संगठनों की मेहनत सफल नहीं हो पा रही है।
जिला प्रशासन द्वारा लावारिस पशुओं को पकड़ने या शहर में उनके प्रवेश पर रोक लगाने का अभी तक कोई प्रबंध नहीं होने पर लोग जहां हादसे का शिकार हो रहे हैं, वहीं कूड़ा फैलाने और गोबर के कारण सफाई अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
सफाई अभियान बाधक और हादसों का कारण बनने पर प्रशासन ने भी इस दिशा में सोचना प्रारंभ कर दिया है। इस मामले में पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को नोडल अधिकारी बनाकर पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा।
शहर की सफाई में आ रही दिक्कतों के बारे में टीम अन्ना ने प्रशासन को इस बारे में अवगत कराया है। डीसी अशोक कुमार मीणा ने एसडीएम को लावारिस पशुओं की समस्या का समाधान करने को कहा है। इस मामले में प्रशासन ने पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को जिम्मेदारी सौंपी है।
बनाई गई रणनीति के तहत प्रशासन गोशालाओं में मौजूद गायों की नंबरिंग करेगी। इसके आधार पर पता लगाया जाएगा कि किस गोशाला में क्षमता से कितने पशु कम या ज्यादा हैं। इसके बाद पकड़े जाने वाले लावारिस पशुओं को गोशालाओं में भेज दिया जाएगा। इसके बाद बचे पशुओं के प्रबंधन के लिए भी नीति बनाई जाएगी। इससे पशुओं की संख्या पर भी अंकुश लगेगा। हर गोशाला में गायों की टेगिंग होने पर उनका रिकार्ड प्रशासन के पास मौजूद रहेगा। फिलहाल शहर में सात गोशाला हैं।
शहर में लावारिस पशु बड़ी समस्या बन चुके हैं। इनके कारण कई बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। पशु विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा को भी अपना शिकार बना चुके हैं। इसके अलावा सामान्य अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्स डॉ. अश्वनी शर्मा की कुछ साल पहले सड़क पर बैठी गायों के कारण सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।
अर्बन इस्टेट निवासी एक बुजुर्ग महिला को भी करीब चार माह पूर्व अपना शिकार बनाया था। महिला दूध लेने जा रही थी और गायों ने उस पर हमला कर दिया था।