3 सफीदों 2 अमित सरोहा द्वारा चलाई जा रही मिनी गौशाला में मौजूद गोवंश। संवाद
सफीदों। गांव सिवाना माल निवासी अमित सरोहा बेसहारा गोवंश की सेवा को जीवन का उद्देश्य बना चुके हैं। वह अपने खर्च पर करीब 50 बेसहारा गोवंशों के लिए नियमित रूप से चारे और पानी की व्यवस्था करते हैं। सड़क पर घायल अवस्था में मिले गोवंश को उपचार केंद्र तक पहुंचाकर उसका इलाज भी करवाते हैं।
अमित ने बताया कि करीब छह साल पहले कोरोना काल में उनके घर के पास एक बछड़ा भूखा-प्यासा पड़ा था। मदद के लिए कोई आगे नहीं आया तो उन्होंने स्वयं उसकी सेवा की। इसी घटना के बाद उन्होंने बेसहारा पशुओं की सेवा को नियमित रूप से अपना लिया। अब कहीं भी भूखा-प्यासा गोवंश दिखाई देने पर वह अपने खर्च पर उसके लिए चारे-पानी की व्यवस्था करते हैं।
अमित ने बेसहारा पशुओं के इलाज के लिए एक ट्रीटमेंट सेंटर भी बनाया है। यहां घायल और बीमार पशुओं का इलाज कराया जाता है। उनके अनुसार अब तक हजारों बेसहारा गोवंशों का इलाज कराया जा चुका है।
अमित का करीब 45 सदस्यों का संयुक्त परिवार है। परिवार करीब 100 एकड़ जमीन पर खेती करता है, जिसमें ज्वार, बाजरा, गन्ना, धान और गेहूं की फसल होती है। गोवंश के लिए चारा भी खेतों से उपलब्ध हो जाता है। परिवार के सदस्य और करीब 45 युवाओं की टीम सेवा कार्य में सहयोग करती है।
हाल ही में लंपी बीमारी के दौरान भी अमित ने आसपास के गांवों में बीमार गोवंश के इलाज में सहयोग किया। उन्होंने अपने खर्च पर दवाइयां खरीदीं और युवा टीम के साथ उपचार कराया। उनका कहना है कि पशुओं की सेवा से उन्हें आत्मिक संतुष्टि मिलती है।