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Jind News: एम्स ने अंधता निवारण पायलट प्रोजेक्ट के लिए जींद को चुना

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02जेएनडी05: डॉ. रमेश पांचाल।
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जींद।
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देश के प्रतिष्ठित संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने जींद जिले को बड़े स्तर पर आंखों की जांच के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना है। चार से 14 मई तक 10 दिनों के लिए अभियान चलेगा। इस दौरान 3200 विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग की जाएगी।
आरबीएचके के नोडल अधिकारी डॉ. रमेश पांचाल ने बताया कि अभियान के तहत जिले के 16 स्कूलों का चयन किया गया है। इनमें आठ सरकारी और आठ निजी स्कूल शामिल हैं। प्रत्येक स्कूल में 200 विद्यार्थियों की आंखों की जांच की जाएगी। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों ही शामिल होंगे।
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जांच के दौरान बच्चों की दृष्टि क्षमता, कम दिखाई देने के कारण और जरूरत पड़ने पर चश्मे या अन्य इलाज की सलाह दी जाएगी। केवल स्कूलों तक ही यह अभियान सीमित नहीं रहेगा बल्कि स्कूलों के आसपास के 16 गांवों को भी इसमें शामिल किया गया है।
प्रत्येक गांव से 18 वर्ष से अधिक आयु के 200 लोगों की आंखों की जांच की जाएगी। इस तरह वयस्क आबादी में भी दृष्टि संबंधी समस्याओं और अंधता के कारणों का अध्ययन किया जाएगा।
एम्स के आई विभाग की करेगी जांच
एम्स के आई विभाग के प्रोफेसर और उनकी विशेषज्ञ टीम इस पूरे अभियान को संचालित करेगी। आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के माध्यम से टीम यह पता लगाएगी कि लोगों में कम दिखाई देने या अंधता के मुख्य कारण क्या हैं और किन स्तरों पर सुधार की जरूरत है। इस पायलट प्रोजेक्ट के जरिए डेटा तैयार किया जाएगा जिससे भविष्य में प्रदेश स्तर पर प्रभावी स्वास्थ्य योजनाएं लागू करने में मदद मिलेगी।
पूर्व उपलब्धियां के आधार पर चुना गया जींद
जींद जिले को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुने जाने के पीछे स्वास्थ्य विभाग की पूर्व उपलब्धियां भी अहम कारण हैं। प्रदेश में स्कूली स्वास्थ्य कार्यक्रम आरबीएचके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के तहत जींद का कार्य प्रदर्शन बेहतर पाया गया। जिले में करीब 5000 बच्चों को चश्मे वितरित किए गए। स्कूलों में नियमित जांच शिविर लगाए गए और 150 बच्चों के दिल के ऑपरेशन करवाए गए। इसके अलावा शारीरिक विकृतियों से जूझ रहे बच्चों की पहचान और इलाज में भी जिला अग्रणी रहा है।
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वर्जन
स्वास्थ्य विभाग को इस योजना के लिए पत्र मिला है। इसके लिए स्टाफ की ड्यूटी लगा दी गई। इस पहल से समय रहते आंखों की समस्याओं का पता चलेगा और भविष्य में अंधता रोकने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
-डॉ. रमेश पांचाल, नोडल अधिकारी आरबीएचके
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