अनाज मंडियों में धान की आवक शुरू हो चुकी है और धान की खरीद के लिए प्रशासन द्वारा सरकारी खरीद एजेंसियां भी अलाट कर दी गई हैं लेकिन खरीद एजेंसियों द्वारा अभी तक अनाज मंडियों में धान की खरीद शुरू नहीं की गई है। सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा खरीद शुरू नहीं किए जाने के कारण प्राइवेट खरीदार अपनी मनमर्जी के रेट पर किसानों की फसल खरीद रहे हैं। खरीद एजेंसियों की इस लापरवाही के कारण सरकार द्वारा गत 25 सितंबर से अनाज मंडियों में सरकारी खरीद शुरू कराने के दावे फेल हो गए हैं।
सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा धान की खरीद शुरू नहीं करने से प्राइवेट खरीदारों में फसल की खरीद को लेकर कंपीटिशन नहीं हो पा रहा है। इसके चलते किसान को फसल के पूरे रेट नहीं मिल पा रहे हैं। धान की खरीद के साथ-साथ बाजरे की खरीद भी सरकारी एजेंसियों द्वारा नहीं की जा रही है। इसके चलते मंडी में बाजरा लेकर आने वाले किसानों का भी यही हाल है। प्रदेश सरकार द्वारा धान की 1509 किस्म की सरकारी खरीद करने का ऐलान किए जाने के बाद गत 25 सितंबर को भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला द्वारा जींद की अनाज मंडी में सरकारी खरीद शुरू कराई थी लेकिन अनाज मंडी में धान की सरकारी खरीद शुरू करवाने का उनका यह दावा केवल फोटो खिंचवाने तक ही सिमट कर रह गया। प्रदेशाध्यक्ष के आदेशों के एक सप्ताह बाद भी अनाज मंडी में धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई है। सरकारी खरीद एजेंसियों की लापरवाही के चलते सरकारी रेट पर धान खरीदने के सरकार के सारे दावे हवा हो रहे हैं।
फसल का नहीं मिल रहा है पूरा भाव
सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा अभी तक बाजरे की खरीद शुरू नहीं की गई है। सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण प्राइवेट खरीदार मनमर्जी के भाव पर फसलों की खरीद कर रहे हैं। इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। किसान को फसल का उचित रेट नहीं मिल पा रहा है।
दलबीर, किसान
प्राइवेट खरीदार अपनी मर्जी के रेट पर कर रहे हैं खरीद
प्राइवेट खरीदार फसलों के पूरे रेट नहीं लगा रहे हैं। प्राइवेट खरीदार अपनी मर्जी के रेट पर फसल खरीद रहे हैं। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। धान की 1509 किस्म का सरकारी रेट 1450 रुपये निर्धारित किया गया है लेकिन प्राइवेट खरीदारों द्वारा मेरी फसल 1400 रुपये के रेट पर खरीदी गई है। सरकारी खरीद नहीं होने के कारण किसानों को नुकसान हो रहा है।
फूल सिंह, किसान
फसल को कुछ तो बीमारी ने खराब कर दिया। रही-सही कसर मंडी में खरीदारों ने पूरी कर दी। किसानों को फसल का पूरा भाव नहीं मिल पा रहा है। 42 हजार रुपये प्रति एकड़ के रेट पर जमीन ठेके पर ली थी लेकिन एक एकड़ में धान हुई 26 हजार की। इस प्रकार प्रति एकड़ के हिसाब से 16 हजार रुपये का नुकसान हो गया।
अजमेर, किसान
सरकारी खरीद एजेंसियों की लापरवाही से किसानों को हो रहा है नुकसान
सरकार द्वारा 1509 किस्म की धान का सरकारी रेट तो निर्धारित कर दिया है लेकिन खरीद एजेंसियां मंडी में पहुंचकर धान की खरीद नहीं कर रही हैं। इससे किसानों को फसल का पूरा भाव नहीं मिल पा रहा है। यदि सरकारी एजेंसी खरीद शुरू कर दें तो प्राइवेट एजेंसियों को निर्धारित रेट से ज्यादा रेट पर किसानों की फसल खरीदनी पड़ेगी। इससे किसानों को काफी फायदा होगा। इसलिए सरकारी खरीद एजेंसियों को चाहिए कि हर रोज मंडी में पहुंचकर धान की फसल की सरकारी खरीद करें, ताकि किसानों को फसलों का पूरा रेट मिल सके।
सुनील कंडेला, प्रदेशाध्यक्ष
कृषि और किसान कल्याण मंच
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फसल अब तक हुई आवक पिछले वर्ष हुई आवक
धान 8135 क्विंटल 2612 क्विंटल
कपास 900 क्विंटल 1330 क्विंटल
बाजरा 2670 क्विंटल 182 क्विंटल
नोट पिछले वर्ष का आंकड़ा इस तिथि तक हुई आवक का है।
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सेंटर का नाम खरीद एजेंसी का नाम
जींद अनाज मंडी हैफड, एफसीआई, एग्रो
नरवाना अनाज मंडी फूड सप्लाई, हैफड, एग्रो
उचाना अनाज मंडी हैफड
पिल्लूखेड़ा अनाज मंडी हैफड
अलेवा अनाज मंडी हैफड
जुलाना अनाज मंडी एफसीआई, एचडब्ल्यूसी
सफीदों अनाज मंडी एफसीआई, एचडब्ल्यूसी
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