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पराली प्रबंधन पर कृषि विभाग ने खर्च किए 40 लाख रुपये, फिर भी जींद दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार

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आरटीआई से मिली जानकारी के बारे में जानकारी देते सूरजमल नैन। - फोटो : Jind
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प्रदूषण नियंत्रण के लिए कृषि विभाग ने पराली न जलाने के लिए किसानों पर 40 लाख रुपये खर्च कर दिए, मगर जिला दुनिया के सबसे दूषित शहरों में 17वें स्थान पर है। कृषि विभाग ने किसानों के लिए आयोजित शिविरों में किसानों को लड्डू और समोसे के साथ खाना भी खिलाया। ढाबे पर किसानों को 120 रुपये प्रति किसान खाना खिलाया गया, मगर हकीकत यह है कि जिले में प्रदूषण की स्थिति खराब है। इसका खुलासा आरटीआई में हुआ है। इसमें कई प्रकार की अनियमितताओं की ओर इशारा हो रहा है। हालांकि कृषि विभाग के अधिकारी तमाम आरोपों से पल्ला झाड़ रहे हैं।
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जींद निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सूरजमल नैन ने पराली प्रबंधन के लिए कृषि विभाग द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी आरटीआई से मांगी थी। इस पर नैन को जो जानकारी मिली, वह चौंकाने वाली है। यह खर्च जुलाई 2018 से लेकर अक्टूबर 2018 तक किया गया है।
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार विभाग ने हर गांव में दो बार किसानों को जागरूक करने के लिए शिविर लगाया। इसमें टेंट लगवाने से लेकर किसानों को रिफ्रेशमेंट और खाने तक पर रुपये खर्च किया गया है। एक किसान को एक समोसा, दो लड्डू व दो गुलाब जामुन खिलाए गए हैं। इस पर कृषि विभाग ने प्रति किसान 57 रुपये खर्च किया। इतना ही नहीं किसानों को एक ढाबे पर 120 रुपये प्रति व्यक्ति खाना खिलाया गया है। आरटीआई कार्यकर्ता का दावा है कि इस प्रकार का खर्च किया नहीं गया और बिल फर्जी बनाए गए हैं। नैन के अनुसार एक ही दुकान के नाम से दो दो बिल काटे गए हैं। दोनों में से किसी भी दुकान पर सामान उपलब्ध ही नहीं है। वहीं आरटीआई से मिले जवाब में व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहा है। जुलाना खंड के पोली गांव में किसानों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया और इसके लिए 40 किलोमीटर दूर से टेंट मंगवाया गया।
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एक ही ढाबे से 42 हजार रुपये का खाना खिलाया
सूरजमल नैन के अनुसार आरटीआई में जो जानकारी दी गई है, उसमें एक ढाबे से ही किसानों को 42 हजार रुपये का खाना खिलाया गया है। जबकि इस ढाबे पर एक बार में दस लोगों के खाना खाने तक की व्यवस्था नहीं है। नैन के अनुसार हर शिविर में टेंट का बिल बना है, लेकिन कहीं भी टेंट नहीं लगाया गया।
आरोप निराधार
कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक करने के लगातार अभियान चलाया है। हर गांव में दो बार शिविर लगाया गया है। कुल 612 शिविर लगाए गए। इस प्रकार के आरोप निराधार हैं। भविष्य में भी इस प्रकार के अभियान चलाए जाएंगे।
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डॉ. सुरेंद्र मलिक, उप कृषि निदेशक, जींद।
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