जींद। वर्ष 2021 में सामाजिक बहिष्कार का शिकार हुए गांव छात्तर के अनुसूचित जाति वर्ग के परिवार चार साल बाद भी न्याय और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मांगों को लेकर 37 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। वीरवार को नायब तहसीलदार उचाना अशोक की अध्यक्षता में अधिकारियों की टीम ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से बातचीत की। मूलभूत सुविधाओं पर चर्चा की।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि सामाजिक बहिष्कार के आरोपी आज भी गांव में सार्वजनिक और सामाजिक कार्यों में बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं। मामले में नामजद 23 आरोपियों में से 20 अब भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं जबकि बिजली लाइन, पेयजल बूस्टर सहित कई विकास कार्य सरकारी स्वीकृति और बजट मिलने के बावजूद अधूरे पड़े हैं।
पीड़ित अनिल, सुमित, जिमी, सुनील, अमित, गुरमीत, सोनिया, नीता का कहना है कि साल 2021 में उनके गांव के सामान्य वर्ग के लोगों के साथ एक विवाद हो गया था जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी। घटना के बाद उन्हें गांव से सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया गया।
अब आरोपी उन पर मामले में समझौता करने का दबाव बना रहे हैं। मना करने पर उनके मोहल्ले में न तो बिजली का ट्रांसफार्मर लगाने दिया जा रहा है और न ही पेयजल की उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। उनके मोहल्ले में पेयजल सप्लाई भी कमी-कभार आती है। कई बार पानी खत्म होने पर उन्हें खेतों से पानी लाना पड़ता है।
वर्ष 2022 में अनुसूचित जाति वर्ग के मोहल्ले में बिजली लाइन बिछाने के लिए एस्टीमेट तैयार कर स्वीकृति दी गई थी लेकिन आज तक कार्य पूरा नहीं हुआ। इसी तरह पेयजल समस्या के समाधान के लिए बूस्टर निर्माण का टेंडर और स्वीकृति होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। कई अन्य विकास कार्य सरकारी रिकॉर्ड में पूर्ण दर्शाए गए हैं,जबकि धरातल पर वे आज भी अधूरे पड़े हैं।
डीसी ने किया था कमेटी का गठन
मामले को लेकर डीसी जींद ने एक कमेटी का गठन किया था। इसमें एसडीएम उचाना, नायब तहसीलदार उचाना, संबंधित विभागों के अधिकारी और पीड़ित पक्ष से सुशील छात्तर को सदस्य बनाया गया था। जिला प्रशासन ने कमेटी को सभी लंबित कार्य पूरे करवाने और समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे लेकिन अभी तक किसी भी कार्य को अमलीजामा नहीं पहनाया गया है।
37 दिनों से गांव में चल रहा धरना
अनुसूचित जाति वर्ग के लोग का 37 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने जारी है। अभी तक जिला प्रशासन की ओर से किसी भी कार्य को धरातल पर शुरू नहीं किया गया है। धरना संचालक एवं भीम आर्मी जिला महासचिव सुशील छात्तर ने कहा कि यदि प्रशासन वास्तव में न्याय चाहता है तो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए। लंबित विकास कार्य शुरू किए जाएं और दलित समाज को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।