जींद। जिले में कहीं भी गेहूं के फाने जलाने वालों के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करेगा। इसको लेकर जिला प्रशासन ने ब्लॉक स्तर पर एसडीएम के नेतृत्व में टीमों का गठन किया है, जो कि आग लगाने की जगह जाकर जांच करेगी और फिर कार्रवाई कर जुर्माना वसूला जाएगा।
फसल अवशेषों (फानों) में आग लगने की घटनाओं पर प्रभावी निगरानी रखने के लिए सैटेलाइट तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है। शुक्रवार को यह जानकारी फसल अवशेष प्रबंधन पर आयोजित बैठक के दौरान डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने दी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यदि कोई किसान अपने खेतों में गेहूं के अवशेषों में आग लगाता है तो इसकी सूचना सैटेलाइट के माध्यम से तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचेगी। फिर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है। साथ ही किसानों की भूमि की उपजाऊ शक्ति को संरक्षित रखना, मित्र कीटों की रक्षा करना और राजमार्गों पर फसल अवशेष जलाने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना भी मुख्य उद्देश्य है। इसी कारण एनजीटी ने गेहूं की पराली में आग लगाने के खिलाफ सख्त आदेश जारी किए गए हैं।
उपमंडल स्तर पर चलेगा जागरूकता अभियान
डीसी ने किसानों को जागरूक करने के लिए उपमंडल स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। इस उद्देश्य से उपमंडल अधिकारी की अध्यक्षता में उपमंडलवार एक टीम गठित की गई है, जिसमें तहसीलदार, खंड विकास और पंचायत अधिकारी, उपमंडल अधिकारी (पंचायती राज), थाना प्रभारी और कृषि विभाग के सभी अधिकारी शामिल हैं।
1981 के तहत होगी सख्त कार्रवाई
डीसी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-163 के तहत आदेश जारी करते हुए पुलिस को इन आदेशों का कठोरता से पालन करवाने के निर्देश दिए है। यदि कोई व्यक्ति इन आदेशों की अवहेलना करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 और बचाव व प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम, 1981 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की ओर से निर्धारित पर्यावरण शुल्क भी वसूला जाएगा।