जींद। देवभूमि बनभौरी में करीब 525 गज जमीन में मां बनभौरी जैन स्थानक का निर्माण होगा। गुरु सेवक सुभाष बनभौरी की ओर से 525 गज जमीन दी गई है। गुरु अरुण चंद्र महाराज के शिष्य अभिषेक मुनि, अनुराग मुनि के सान्निध्य में निर्माण की ईंट रखी गई। अभिषेक मुनि की जन्म स्थली बनभौरी है।
प्रवचन में अभिषेक मुनि ने कहा कि जो इंसान सच्चे मन से भक्ति करता है उसके सारे कार्य सफल होते हैं। कहानी के माध्यम से बताया कि एक गुरु व उसके काफी शिष्य थे। सभी शिष्य समझदार थे लेकिन एक शिष्य भोला था।
भोला शिष्य गुरु को आकर बोला आपने सभी शिष्यों को मंत्र दे रखें हैं सारा ज्ञान दे रखा है ऐसे में उनके पास काफी श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।मुझे भी मंत्र दो ताकि मैं भी प्रसिद्ध हो जाऊं। गुरु ने इस पर मना कर दिया और शिष्य उदास होकर बैठ गया।
उन्होंने आगे बताया कि एक बार गुरु प्रवचन कर रहे थे। वो शिष्य फिर गुरु के पास आया और सभा में मंत्र लेने की जिद्द करने लगा। गुरु ने परेशान होकर कहा कि ए मुर्ख वैला देखना कुबेला देखना शिष्य ने सोचा कि गुरु ने गुरु मंत्र दे दिया। उस मंत्र को वो सुबह, शाम सच्चे मन जपने लगा लेकिन जो दूसरे शिष्य थे वो उसका मजाक उड़ाने लगे पर वह उसी मंत्र के जाप में लगा रहा।
एक दिन राजा के बेटे को सांप ने काट लिया। राजा साधुओं की शरण में गया लेकिन कुछ नहीं हुआ। जो भोला शिष्य था वो गुरु को कहना लगा कि राजा के बेटे को बचाने के लिए वो एक बार जाएगा लेकिन गुरु ने मना कर दिया। गुरु के पास जो दूसरे शिष्य थे उनके कहने पर उस भोले शिष्य को राजा के पास जाने दिया।
जैन मुनि ने आगे बताया कि भोला शिष्य राजा के पास गया और कहा कि वो उसके बेटे को बचा सकता है। बेटे के पास राजा उसको लेकर गया तो उसने उसी मंत्र को उच्चारण करना शुरू कर दिया जो शब्द गुरु ने गुस्से में उसे कहे थे।
सांप का बिल भी वहीं था सांप तक जब उस मंत्र की ध्वनी पहुंची तो सांप ने सोचा कि मैंने गलत काम कर दिया है सांप बिल से बाहर आया तो राजा के बेेटा का विष पी गया। ऐसे में राजा का बेटा जीवत हो उठा।
गुरु को भी आश्चर्य हुआ कि जो कोई नहीं कर सका वो भोले शिष्य के कर दिया। गुरु को फिर समझ में आया कि जो सच्चे दिल से भक्ति करता है उसके सारे कष्ट अपने आप कट जाते हैं। इस दयानंद मित्तल, वीरेंद्र करसिंधु, शीलू बुडायन, विकास मखंड, होशियारी जैन, सज्जन जैन।