जींद। हवा में बढ़ रहे प्रदूषण का असर अब अस्पतालों में बढ़ रही रोगियों की संख्या से साफ नजर आने लगा है। इस समय हवा में प्रदूषण का स्तर पीएम-2.5 अधिकतम 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर पहुंच गया है। वहीं जींद जिले की हवा में प्रदूषण का स्तर 429 पर पहुंच गया है, जोकि मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। इस कारण नागरिक अस्पताल में शुक्रवार को मरीजों की भारी भीड़ रही।
इनमें अधिकतर मरीज एलर्जी, आंखों में पानी आने व सांस के रहे। शुक्रवार को अस्पताल में कुल ओपीडी 987 रही, जिनमें से 250 मरीज ऐसे थे, जिन्होंने आंखों व सांस के चिकित्सकों को दिखाया। पूरे दिन जिले को स्मॉग की चादर ने ढके रखा। दिनभर ऐसा लगता रहा कि मानो धुंध पड़ रही हो। दिनभर एक्यूआई का का स्तर 324 और 488 के बीच घूमता रहा।
हवा में प्रदूषण इस कदर बढ़ गया है कि शुक्रवार को जींद स्मॉग की चादर से ढका रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में तो सुबह के समय सड़क पर दृशयता बेहद कम रही। वाहन चालकों को पास का भी कुछ नहीं दिखाई दे रहा था। ऐसे में वाहन चालक सुबह के समय लाइटें जला कर वाहन चलाते हुए दिख रहे थे। हालांकि सूर्य देवता बादलों की ओट से बीच-बीच में झांक भी रहे थे लेकिन स्मॉग इतना गहरा था कि सूर्य की तपिश बेअसर रह रही थी। जिले की हवा में प्रदूषण का स्तर 429 पर पहुंच गया है जोकि मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। ऐसे में आंखों में जलन और सांस रोगियों को भी परेशानी होने लगी है। नागरिक अस्पताल के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी मरीज पहुंचने शुरू हो गए हैं। नागरिक अस्पताल की बात की जाए तो यहां पिछले दो दिन से आंखों में जलन के डेढ़ गुणा मरीज सामने आए हैं। अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गीतांशु ने बताया कि आंखों में पानी आने व जलन की शिकायत लेकर मरीज आ रहे हैं। इसलिए सभी को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा सांस के रोगी भी अस्पताल में उपचार के लिए आ रहे हैं।
स्मॉग से हो सकती हैं ये समस्याएं
स्मॉग से आंखों में जलन, श्वास संबंधी परेशानियां, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। सबसे ज्यादा परेशानी अस्थमा मरीजों को होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को तो इस मौसम में विशेष सावधानी रखने की जरूरत होती है।
ये बरतें सावधानियां
सुबह-शाम टहलने से बचें। कमरे में एग्जॉस्ट चलाएं। घर से बाहर निकलें तो मुंह पर रुमाल या मास्क लगा लें। पेय पदार्थ ज्यादा लें। गर्म पानी का प्रयोग करें। खांसी, गले और छाती में संक्रमण होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। जिन लोगों को अस्थमा है उनके लिए यह काफी खतरनाक है। ऐसे में खिड़कियां या दरवाजे बंद रखें। हरी सब्जियों व पौष्टिक आहार का सेवन करें, धूम्रपान नहीं करें। बाहर से आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ करें।
प्रदूषण बढ़ने से सांस, एलर्जी के मरीजों को परेशानियां बढ़ जाती हैं। टीबी के मरीजों पर भी इस मौसम का खास असर पड़ता है। ऐसे में सांस के मरीज व छोटे बच्चों को बाहर निकलने से बचना चाहिए। घर से बाहर निकलें तो मास्क अवश्य पहनें। आंखों से पानी आने, जलन होने या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह लें।
-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस नागरिक अस्पताल।