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जहरीली हुई जींद की हवा, एक्यूआई पहुंचा 426

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जिले की आबोहवा इस वर्ष की अब तक सबसे जहरीली हो गई है। अब तक वायु प्रदूषण इतना अधिक नहीं बढ़ा था, जितना वीरवार का ेपहुंच गया। वीरवार को एक्यूआई 500 तक पहुंचने के बाद रात को आठ बजे 426 तक वापस आ गया। इसके पीछे दिवाली पर्व को लेकर आमजन द्वारा बेतहाशा पटाखे बजाए गए। इसके बाद किसानों द्वारा लगातार रोक के बाद पराली जलाई गई। इससे आसमान में धुएं की मोटी चादर बन गई और इससे हवा में प्रदूषण का स्तर पीएम-2.5 अधिकतम 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर पहुंच गया है। प्रदेश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार हो चुके जींद में वीरवार को धुएं से आसमान में स्मॉग की चादर छाई हुई थी और जींद की आबोहवा पूरी तरह जहरीली हो चुकी थी। लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही थी जबकि आंखों में भी जलन महसूस हो रही थी।
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जींद जिले की हवा में प्रदूषण का स्तर 426 पर पहुंच गया है जोकि मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। दीपावली पर्व पर हुई आतिशबाजी के चलते एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडक्स) 339 तक पहुंच गया था। इसके बाद रही-सही कसर किसानों ने पूरी कर दी और रोक के बाद जमकर पराली को जलाया। इससे आसमान में स्मॉग की चादर छा गई तो आंखों में जलन महसूस हुई। बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सांस लेने में परेशानी हुई।
एक सप्ताह का वायु प्रदूषण स्तर
तिथि एक्यूआई (पीएम 2.5)
तीन नवंबर 426
दो नवंबर 311
एक नवंबर 283
31 अक्टूबर 365
30 अक्टूबर 280
29 अक्टूबर 339
28 अक्टूबर 337
300 से ज्यादा स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
0-50 स्वास्थ्य के लिए बेहद अच्छा, 51-100 संतोषजनक (संवेदनशील लोगों को सांस लेने में मामूली तकलीफ), 101-200 संतुलित (फेफड़े, दमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सांस लेने में तकलीफ ), 201-300 पूअर (लंबे समय तक एक्सपोजर पर ज्यादातर लोगों को सांस लेने में तकलीफ ), 301-400 वैरी पूअर (लंबे समय तक एक्सपोजर पर सांस की बीमारी होने का खतरा), 400-500 बेहद गंभीर जो स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित करता है और सांस की बीमारियों वाले लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
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इन तरीकों से बचाएं अपने आप को
- तेज बाइक चलाने से बचें। बाइक चलाते हुए चश्मे का प्रयोग करें।
- आंख से पानी आने या जलन की समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह लें।
- घर में ही रह कर नियमित व्यायाम करें।
- इस समय सुबह व शाम की सैर को कुछ दिनों के लिए रोक दें और घर में ही रहकर व्यायाम करें।
- एलर्जी के मरीजों को इस समय खुले में ज्यादा घूमने से बचना चाहिए।
- घर से बाहर निकलते हुए मास्क का प्रयोग करें।
इस समय हवा में प्रदूषण का स्तर 426 पहुंच चुका है जो एलर्जी, सांस व छोटे बच्चों के लिए खतरनाक है। प्रदूषण बढ़ने से सांस, दमा, एलर्जी के मरीजों की परेशानियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में एलर्जी मरीजों को इस दौरान बाहर बेहद कम निकलना चाहिए। बाहर निकलते हुए मास्क का प्रयोग करना चाहिए।
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-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल।
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