महाश्री क्वीन ने सरस्वती क्वीन को 12 अंकों से दी मात
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। निडानी गांव स्थित खेल स्कूल में चल रहे महिला सर्कल कबड्डी लीग के तीसरे दिन कड़े मुकाबले हुए। पहला मुकाबला महाश्री क्वीन व सरस्वती क्वीन के बीच हुआ। इसमें महाश्री क्वीन ने 35 अंक हासिल किए, जबकि सरस्वती क्वीन ने 23 अंक अर्जित किए। महाश्री क्वीन ने यह मुकाबला 12 अंकों से जीता। इस मैच में रेनू को बेस्ट रेडर तथा बलजीत कौर को बेस्ट कैचर घोषित किया गया। दूसरा मुकाबला गोल्डन क्वीन तथा पंजाब क्वीन के बीच हुआ। इसमें पंजाब क्वीन ने 35 अंक अर्जित किए तो गोल्डन क्वीन ने 27 अंक अर्जित किए। यह मैच पंजाब क्वीन ने आठ अंकों से अपने नाम किया। इस मैच में सोनिया को बेस्ट रेडर और ऋतु सोता को बेस्ट कैचर घोषित किया गया।
तीसरा मुकाबला हरियाणा शेरनी और पद्मश्री क्वीन के बीच हुआ। इसमें हरियाणा शेरनी ने 31 अंक अर्जित किए तो पद्मश्री क्वीन को 28 अंक मिले। यह मुकाबला हरियाणा शेरनी ने तीन अंकों के अंतर से जीत लिया। इसमें सुमित और करमी चहल को बेस्ट रेड का खिताब मिला तो सुशीला को बेस्ट कैचर का। आज के खेलों का शुभारंभ भाई सुरेंद्र सिंह मेमोरियल खेल स्कूल निडानी की चेयरपर्सन कृष्णा मलिक ने किया। उन्होंने पहले खिलाड़ियों से परिचय लिया। उसके बाद खेलों का शुभारंभ हुआ। कृष्णा मलिक ने कहा कि भारतीय कबड्डी संघ कबड्डी खेल को बढ़ावा देने का बहुत सराहनीय कार्य किया है। पूरे भारत इस प्रकार की महिला सर्कल कबड्डी प्रतियोगिता पहली बार हो रही है। अब तक केवल नेशनल कबड्डी को ही दूसरे संगठनों ने बढ़ावा दिया है। भारतीय कबड्डी संघ ने सर्कल कबड्डी को बढ़ावा दिया है। इस मौके पर सुदेश कुमार सरावत, रोहताश नांदल, हरबीर कौर, आनंद लाठर, सुखदर्शन चहल, मुकेश खटकड़, बलवान सिंह, सुरेंद्र घणघस, प्रलाद सिंह, प्राचार्य रामचंद्र, कृष्ण कुमार भी मौजूद रहे।
पिता की मौत के बाद बनाया खेल को ही अपनी आय का माध्यम
जींद। निडानी गांव के भाई सुरेंद्र सिंह मेमोरियल खेल स्कूल में हो रही इंटरनेशनल महिला सर्कल कबड्डी प्रतियोगिता में खिलाडिय़ों में एक ऐसी भी खिलाड़ी है, जिसने खेल को ही अपनी आय का माध्यम बना रखा है। अपनी मेहनत व परिश्रम से खेलों के माध्यम से होने वाली आय से ही पंजाब जिले के तरनतारण जिला के गांव जोड़ा निवासी 19 वर्षीय वीरपाल कौर अपने घर का खर्च चलाती हैं। पांच वर्ष पहले उनके पिता की मौत के बाद वीरपाल कौर खुद भी पढ़ती हैं तथा अपने छोटे भाई को भी पढ़ाती हैं। अब तक वीरपाल कौर के नाम कई खिताब हो चुके हैं।
वीरपाल कौर के पिता हरजिंदर सिंह की मौत पांच साल पहले हो गई थी। उस समय वीरपाल कौर ने कबड्डी खेल शुरू ही किया था। पिता की मौत के बाद वीरपाल कौर पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। अन्य साधनों से परिवार का गुजारा नहीं चलते देख वीरपाल कौर ने कबड्डी को ही अपना माध्यम बनाकर परिवार का गुजारा चलाना शुरू कर दिया। वीरपाल कौर खुद बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है तथा अपने छोटे भाई जुगराज को भी पढ़ाती है। उसका भाई 12वीं कक्षा का छात्र है। वीरपाल कौर इंटरनेशनल महिला सर्कल कबड्डी प्रतियोगिता में गोल्डन क्वीन की तरफ से खेल रही हैं। उनके कोच सुरेंद्र घणघस बताते हैं कि वीरपाल कौर एक होनहार तथा मेहनती खिलाड़ी है। अपनी मेहनत के बल पर वह देश की टॉप-टेन खिलाडिय़ों में शुमार है। भारतीय कबड्डी संघ के मीडिया चेयरमैन आनंद लाठर ने केंद्र व पंजाब सरकार से इस उभरती हुई महिला खिलाड़ी वीरपाल कौर को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
ये खिताब हैं वीरपाल कौर के नाम
2014 में हुए स्कूली गेम्स में अंडर-19 में वीरपाल कौर ने गोल्ड मेडल जीत
2015 में नेशनल महिला कबड्डी में गोल्ड मेडल
2016 में शहीद भगत सिंह गेम्स में ब्रांज मेडल
2017 में सीनियर स्टेट सर्कल स्टाइल कबड्डी में गोल्ड मेडल
2017 में नेशनल स्टाइल कबड्डी में सिल्वर मेडल
2017 में नेशनल व विश्व कप कैंप में भाग लिया
2018 में हैदराबाद में हुई सीनियर नेशनल चैंपियनशिप की कबड्डी में ब्रांज मेडल
2018 में मुंबई में हुई फेडरेशन कप में कबड्डी में ब्रांज मेडल