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28 साल बाद भी बीरेंद्र सिंह को साल रह है मुख्यमंत्री नहीं बनने का दर्द

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28 साल बाद भी बीरेंद्र सिंह को साल रह मुख्यमंत्री न बनने का दर्द
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। राजनीति में मौका एक बार हाथ से निकल जाय तो फिर कुछ नहीं हो सकता। यही कारण है कि केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह को 28 साल बाद भी मुख्यमंत्री नहीं बनने का दर्द साल रहा है। एक बार फिर वीरवार को वह अपना यह दर्ज बया करने से खुद को नहीं रोक पाये। उन्होेंने कहा कि 1991 में हुई दो हत्याओं के कारण जींद को चौधर नहीं मिल सकी। इनमें से एक हत्या दक्षिण में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की थी और दूसरी हत्या जींद में ही जींद की चौधर की हुई।
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पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज कुछ लोग जींद में चौधर लाने की बात कर रहे हैं, जबकि 1991 में ही जींद में चौधर आ रही थी, लेकिन कुछ लोगों ने नहीं आने दी। जब उनसे नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शमशेर सिंह सुरजेवाला के अलावा कई अन्य नाम हैं जिसे चुनाव के बाद बता देंगे। जानकारी के लिए 1991 के चुनाव में जींद की पांच विधानसभा सीटों में से चार कांग्रेस ने जीती थी। उस समय जुलाना से लोकदल के सूरजभान काजल विधायक बने थे। इसके अलावा जींद से कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता, सफीदों से बचन सिंह आर्य, नरवाना से शमशेर सुरजेवाला और उचाना से खुद बीरेंद्र सिंह विधायक बने थे। तत्कालीन भजनलाल सरकार में जींद के चारों विधायकों को मंत्री बनाया गया था। बीरेंद्र सिंह का कहना है कि उस समय यदि जींद के विधायक उनका साथ देते तो जींद में चौधर आ सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अब लोग जींद में चौधर के नाम पर लोगों को बरगला रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज लोग नौकरी के लिए उन्हें पर्ची देते हैं, लेकिन यदि चौधर जींद में आ जाती तो आज कोई पर्ची देने वाला नहीं मिलता।
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