नगर परिषद के चुनाव को लेकर संशय बरकरार
हाईकोर्ट का आदेश न कराया जाए चुनाव, इसके बावजूद हुई वोटिंग, चुनाव अधिकारी बोले मतदान के बाद मिला है अदालत का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। जिला प्रशासन ने सोमवार को नगर परिषद के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के लिए चुनाव कराया जिसको लेकर फिलहाल संशय बरकरार है। चुनाव में छवि बंसल के खिलाफ कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं आया, जबकि वाइस चेयरमैन के लिए दो उम्मीदवार मैदान में थे। हालांकि प्रशासन की ओर से अधिकारिक रूप से परिणाम घोषित नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार अजमेर श्योकंद को 17 और श्वेतारानी को आठ वोट मिले हैं। निर्वाचन अधिकारी रामफल कटारिया के अनुसार प्रशासन को मतदान के बाद हाईकोर्ट से किए गए स्टे की प्रति मिली है। जिससे चुनाव परिणाम घोषित नहीं किया जा सका।
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डायरेक्टर करेंगे विधिवत घोषणा
चुनाव अधिकारी रामफल कटारिया ने बताया कि उन्होंने वोटिंग करा दी है। परिणाम सील बंद करके डीसी कार्यालय में जमा कराया जाएगा। इसकी विधिवत घोषणा डायरेक्टर करेंगे। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि चुनाव प्रक्रिया समय पर शुरू कराई गई थी। चुनाव संपन्न होने के बाद सवा बारह बजे उन्हें स्टे की कॉपी मिली थी।
30 को होनी थी सुनवाई फिर कराया चुनाव
निवर्तमान चेयरमैन सुरेश के हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव पर स्टे लगाने की गुहार पर सोमवार को चुनाव पर स्टे किया गया। हाईकोर्ट ने सरकार को कहा कि यह मामला पहले की कोर्ट में विचाराधीन है, जिसकी सुनवाई 30 जनवरी हो होनी है। इस सूरत में चुनाव नहीं कराया जा सकता।
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भाजपा, कांग्रेस और इनेलो के कार्यकर्ता खुश
भाजपा से संबंध रखने वाले हंसराज समैन की पुत्रवधू के चेयरमैन बनने से भाजपा कार्यकर्ता, इनेलो उन्हें बनाकर और कांग्रेस कार्यकर्ता कोर्ट से स्टे होने पर खुश होकर नगर परिषद से बाहर निकले। सभी 23 पार्षदों, सांसद चरणजीत रोड़ी और विधायक पिरथी सिंह नंबरदार ने वोटिंग में भाग लिया। राजू पार्षद को घायल होने के बाद भी पार्षद कृष्ण मोर और सुरेद्र मोर सहारा देकर नगर परिषद में लाए।
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कानून कायदे ताक पर रखकर कार्य कर रहा है प्रशासन
नप के पूर्व प्रधान कैलाश सिंगला ने सोमवार को हाईकोर्ट के चुनाव पर स्टे करने के आदेश के बावजूद वोटिंग कराने को सरासर गलत बताया। सिंगला ने बताया कि हाइकोर्ट के आदेश का तुरंत डीसी कार्यालय से फोन तहसीलदार दर्शन सिंह के पास आया जिस पर चुनाव अधिकारी ने कोई संज्ञान नहीं लिया। पार्षदों के बताने पर भी चुनाव प्रक्रिया जारी रखी। हाईकोर्ट में तीस जनवरी की तारीख होने के बावजूद 29 जनवरी को चुनाव कराने का फैसला लिया गया। 26 जनवरी का अवकाश होने के बावजूद नोटिस निकाले और उस पर 25 जनवरी की तारीख दिखाई गई और रात को नोटिस बांटे गए। 27 और 28 को फिर अवकाश थे। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन भाजपा सरकार के आला नेताओं के इशारे पर सभी गलत कार्य करने में जुटा है।