सफीदों। जैन मुनी सत्यप्रकाश ने कहा कि मां बच्चे का भाग्य लिखने की सबसे बड़ी कलम है और संसार में महिला सेवा की सबसे बड़ी प्रतिमूर्ति है। वह रविवार को जैन स्थानक में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मां की छाया में ही बच्चे को विकास होता है। एक स्त्री ही पूरे संसार की जननी है। सबसे पहले शिक्षा का प्रचार-प्रसार भगवान ऋषभदेव की पुत्री ब्राह्मी व सुंदरी ने किया था। आज भी संसार में ब्राह्मी लिपी चल रही है। सबसे पहले केवल ज्ञान माता मरू देवी को हुआ था। उन्होंने महिला शब्द का संधी विच्छेद करते हुए बताया कि म से ममता, ह से हां में हां, ई से इंद्रियों पर काबू करने वाली, ल से लग्र व अ से आचरण बनता है।