जींद। निपुण मिशन के तहत अब जिले के हर स्कूल में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को सुधारने के लिए 90 दिवसीय कार्ययोजना तैयार की जाएगी। योजना में पीए-1 के परिणाम को आधार बनाकर कमजोर दक्षताओं वाले बच्चों की पहचान की जाएगी और उनके लिए उपचारात्मक शिक्षण कराया जाएगा। कैप्सूल स्कूलों के साथ अन्य स्कूलों की भी नियमित मॉनिटरिंग होगी।
जिले में एफएलएन विजिट को लेकर भी एडीसी प्रदीप कुमार ने बैठक लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। 60 दिन से अधिक समय से जिन स्कूलों में एफएलएन विजिट नहीं हुई है, वहां अधिकारियों को प्राथमिकता से पहुंचना होगा।
विजिट के दौरान केवल औपचारिक निरीक्षण के बजाय बच्चों का सीखने का स्तर, शिक्षक की शिक्षण प्रक्रिया, टीएलएम का इस्तेमाल और निपुण लक्ष्यों की स्थिति देखी जाएगी। विजिट की पुष्टि के लिए सेल्फी और विजिट रजिस्टर में आवश्यक विवरण दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।
पीए-1 में 50 प्रतिशत से कम विद्यार्थियों की भागीदारी वाले 14 स्कूलों के मुखियाओं से स्पष्टीकरण लिया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आकलन के परिणामों पर शिक्षक स्तर पर चिंतन-मंथन कर आगामी शिक्षण रणनीति तैयार करें।
प्रत्येक विजिट के बाद एक्शन टेकन रिपोर्ट के जरिये यह भी देखा जाएगा कि पहले दिए गए निर्देशों पर कितना अमल हुआ। अभिभावकों को एप से जोड़ने तथा बच्चों के सीखने में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएं। इसके साथ ही बालवाटिका-3 के विद्यार्थियों के बैंक खाते खुलवाने की प्रगति की भी समीक्षा करवाई जाएगी। संबंधित अधिकारियों को शेष बच्चों के बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा करवाया जाएगा।
वर्जन
एफएलएन विजिट का उद्देश्य केवल संख्या पूरी करना नहीं, बल्कि स्कूलों को अकादमिक सहयोग देना है। पीए-1 के परिणाम के आधार पर 90 दिवसीय योजना पर गंभीरता से काम किया जाए। बच्चों के सीखने में सुधार में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों की सूचना जिला मुख्यालय को भेजी जाए और जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
- प्रदीप कुमार , एडीसी जींद।