जिस मिड्ढा परिवार ने भाजपा को दी थी शिकस्त, वहीं बना तारणहार
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। विधानसभा चुनाव में लहर के बाद भी जींद विधानसभा सीट से जिस उम्मीदवार से भाजपा का उम्मीदवार हार गया था। उसी के परिवार के सदस्य को अपनी पार्टी में मिलाकर भाजपा ने जींद की वैतरणी पार कर ली है। पार ही नहीं की बल्कि अब तक के रिकार्ड अंतर से विजय भी हासिल की है। विधानसभा चुनाव में डॉ. कृष्ण मिड्ढा के पिता डॉ. हरिचंद मिड्ढा ने भाजपा को 2257 मतों से ही हराया था, मगर उनके पुत्र डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने भाजपा की चुनावी वैतरणी पार लगा दी है।
दरअसल 2014 के विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा के सुरेंद्र बरवाला और इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा के बीच हुआ था। डॉ. हरिचंद मिड्ढा के कार्यकाल में इनेलो में रहते जिस डॉ. कृष्ण मिड्ढा के निशाने पर विकास को लेकर भाजपा रही, चुनाव से महज दो महीने पहले उसे भाजपा ने अपनी राजनीतिक पतवार बनाकर वैतरणी पार कर ली। पिछले चुनाव में डॉ. कृष्ण मिड्ढा के पिता डॉ. हरिचंद मिड्ढा, सुरेंद्र बरवाला व टेकराम कंडेला उम्मीदवार थे। तीनों को मिलाकर 72 हजार मत मिले थे। इनमें डॉ. हरिचंद मिड्ढा को 31631, सुरेंद्र बरवाला को 29374 और टेकराम कंडेला को 11 हजार मत मिले थे। इस बार भी सुरेंद्र बरवाला और टेकराम कंडेला भाजपा के टिकट के दावेदार थे, लेकिन अंतिम समय में डॉ. कृष्ण मिड्ढा टिकट हासिल करने में सफल रहे। इससे सुरेंद्र बरवाला और टेकराम कंडेला भाजपा से नाराज गए, लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दोनों को मनाने में सफल रहे। इससे भाजपा के उम्मीदवार की स्थिति काफी मजबूत हो गई।
कामयाब रही भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग
उपचुनाव में भाजपा ने शहरी उम्मीदवार को टिकट देकर ग्रामीण कार्यकर्ताओं को मजबूत किया। यह सोशल इंजीनियरिंग काफी सफल रही। हालांकि टेकराम कंडेल के साथ आने के बावजूद भाजपा कंडेल खाप के गांवों में जीत दर्ज नहीं कर सकी, पर हर गांव से काफी वोट भाजपा को मिले। इसकी उम्मीद भाजपा के लोगों को भी नहीं थी। यही समीकरण भाजपा की जीत का मुख्य कारण बना।