अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
जिला में शराब के ठेके खोलने को लेकर हर साल विवाद होता है, लेकिन इस बार शराब ठेके खुलने से पहले ही विवाद शुरू हो गया है। कारण है ग्राम पंचायतों द्वारा शराब ठेका नहीं खोलने की मांग को आबकारी विभाग द्वारा निरस्त करना। जिला की कुल 43 पंचायतों ने शराब ठेके हटाने की मांग की थी, इसमें महज चार पंचायतों के आवेदन ही सरकार ने स्वीकार किए हैं। ऐसे में नए शराब ठेके शुरू होने पर विवाद होनी की आशंका है।
गांवों में शराब ठेका नहीं खोलने के लिए पंचायत द्वारा आबकारी विभाग को प्रस्ताव भेजना होता है। यह प्रस्ताव तो इस बार भी भेजा गया, लेकिन आबकारी विभाग ने इससे कानून का हवाला देकर मानने से मना कर दिया। दरअसल आबकारी विभाग के नियमानुसार पंचायत के प्रस्ताव पर उन गांवों में ही शराब ठेके बंद किए जा सकते हैं, जिनमें पिछले दो साल में अवैध शराब बिक्री का मामला नहीं आया हो। इसी आधार पर 43 में से 39 पंचायतों का प्रस्ताव रद्द कर दिया गया।
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इन पंचायतों ने भेजा प्रस्ताव
आबकारी विभाग के अनुसार इस पर नए शराब ठेके शुरू होने से पहले खूंगा, लोहचब, निर्जन, लखमीरवाला, ईंटल कलां, शामदो, राजपुरा, कोयल, कलावती, भिखेवाला, निडानी, अमरहेड़ी, खोखरी, बिरोली, किशनपुरा, किनाना, बराह खुर्द, सिवाहा, जलालपुर कलां, जुलानी, शादीपुर, मोरखी, मालसरी खेड़ा, गांगोली, पाजू कलां, मलार, राजगढ़, कमाचखेड़ा, करेला, रामकली, सुदकैण कलां, नहरा, फरैण कलां, धमतान साहिब, तारखां, खटकड़, बुडायन, रायचंद वाला, चूहड़पुर, थूआ, ललितखेड़ा व बेलरखां गांव की पंचायतों ने गांवों में शराब ठेके नहीं खोलने के प्रस्ताव भेजे थे। इस पर खूंगा, लखमीरवाला, सुदकैण कलां व ईंटल कलां गांवों में ही शराब ठेके नहीं खोलने के प्रस्ताव को मंजूर किया गया है।
जिला में 317 शराब की दुकान
जिला में शराब की 317 दुकान हैं। इनसे प्रतिवर्ष सरकार को 100 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है। हालांकि गांवों को भी शराब की बिक्री पर कुछ पैसे मिलते हैं, लेकिन गांवों में शराब के कारण होने वाले झगड़े और अन्य वारदातों को रोकने के लिए पंचायतों ने प्रस्ताव भेजे हैं।
अगली बार फिर करेंगे प्रयास
गांव में शराब ठेका हटवाने के लिए पंचायत ने प्रस्ताव भेजा था। इस पर नियम बताया गया कि गांव में पिछले दो साल में अवैध शराब बिक्री का कोई केस नहीं होना चाहिए। पिछले एक साल में गांव में इस प्रकार का मामला नहीं है। ऐेसे में अगली बार फिर से प्रयास करेंगे।
मुकेश, सरपंच मोरखी।
महिलाओं को होती है परेशानी
गांव शराब का ठेका उसी रास्ते पर है, जहां से महिलाएं पानी लेने जाती हैं। इसको हटाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था। इसके लिए पंचकुला में जकार पंचायत ने अपना पक्ष भी रखा, लेकिन शराब का ठेका नहीं हटाया जा रहा है। इससे गांव के लोगों में रोष है।
पुष्पा देवी, सरपंच निडानी।
शराब का ठेका हटवाने के लिए 43 पंचायतों के प्रस्ताव आए थे। यह सभी आबकारी विभाग के आयुक्त कार्यालय में भेजे गए। वहां पंचायतों ने अपना पक्ष भी रखा है। जिन गांवों में पिछले दो साल में अवैध शराब का मामला आया है, वहां शराब का ठेका नहीं हटाया जा सकता। ऐसे में चार पंचायतों को ही इसका लाभ मिला है।
सत्यबाला, उप आबकारी एंव कराधान आयुक्त जींद।