ब्लू व्हेल गेम को लेकर छात्राओं को किया जागरूकता
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। भारतीय रेडक्रास सोसायटी द्वारा आयोजित पांच दिवसीय जूनियर रेडक्रास प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट के निदेशक राजकुमार भोला ने ब्लू व्हेल गेम को लेकर छात्र छात्राओं को जागरूक किया। पटवार भवन में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में 40 लड़के व 40 लड़कियां भाग ले रहे हैं । उनके साथ उनके शिक्षक भी आए हुए हैं । प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन योगाचार्य सूर्यदेव आर्य ने छात्रों को योग से संबंधित जानकारी दी। सामान्य अस्पताल से डॉ. उषा जाटान ने बच्चों को शारीरिक विकास व स्वास्थ्य संबंधित जानकारी दी। गांव मलार राजकीय स्कूल के प्राचार्य रणधीर सिंह सैनी ने विस्तार से प्राथमिक उपचार की जानकारी विद्यार्थियों को प्रदान की। महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट के निदेशक राजकुमार भोला ने बताया कि दुनिया में डेथ गेम ब्लू व्हेल का खौफ दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। इसका खौफ अब दुनिया भर से होकर हरियाणा पहुंच चुका है। भारत सहित पूरी दुनिया में इस गेम के चलते बच्चों और वयस्कों की मौत की खबरें आ रही हैं। इस गेम में 50 दिन में 50 काम करने होते हैं और 50वें दिन का काम सुसाइड करना होता है। गेम की शुरुआत में अजीबोगरीब काम दिए जाते हैं जैसे शुरुआत में कोई अजीब गाना सुनना, रात में जागना होंठ काटना, हाथ की नस काटना सुई से छेदना, हाथ पर काटकर व्हेल का फोटो बनाना जैसे कई टास्क हर दिन दिए जाते हैं साथ ही छत के किनारे पर, पुल के किनारे पर और ऊंची बिल्डिंग पर बैठने को उकसाया जाता है इस टास्क के बारे में किसी को बताने से भी मना किया जाता है और आखिरी दिन सुसाइड करने के लिए भेजा जाता है, इसे खेलने वाले को म्यूजिकल फिल्म, धमकियों और खुद को टॉर्चर करवा कर इस हाल तक पहुंचा दिया जाता है कि उसे सुसाइड करना भी गलत नहीं लगता इस गेम के बैकग्राउंड में जो म्यूजिक चलता है, कहा जाता है कि ये नेगेटिव फीलिंग्स और डिप्रेशन को बढ़ावा देता है। इन सभी विषयों की जानकारी प्रशिक्षण शिविर में ब्लू व्हेल गेम को लेकर दी गई । जिसमें विद्यार्थियों को इस गेम से को बचने के बारे में बताया गया। महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट के निदेशक राजकुमार भोला ने बताया कि ब्लू व्हेल गेम जानलेवा है। इस बात को युवा पीढ़ी नहीं समझ पा रही है। बच्चे इस गेम को जिज्ञासा वश खेलना शुरू करते है। इसके बाद उन्हें इसमें दिलचस्पी बढ़ने लगती है। उन्हें हर एक टास्क मौत की तरफ ले जाता है। गेम वालों को यह दुनिया बेकार लगने लगती है और अपने परिजनों, दोस्तों से कट जाता है। वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते है और लास्ट में वह मौत का रास्ता चुन लेते है। उन्होंने कहा कि आप अपने साथियों की हरकतों पर नजर रखें। यदि वह किसी कारणवश सुस्त है या वह किसी बात को लेकर बेचैन है तो उससे बात करें। उसके मन को टटोलने की कोशिश करे, यदि आपका कोई साथी ब्लू व्हेल गेम की चपेट में है तो तुरंत उसके माता पिता व अध्यापकों को सूचित करें ।
कैसे बचे
किसी भी सोशल मीडिया साइट पर कोई ऐसा टास्क न ज्वाइन करे, अगर कोई आपको ऐसा मैसेज कर रहा है तो उसकी फौरन रिपोर्ट करे, किसी भी हाल में किसी अंजान व्यक्ति का कोई काम न करें । अगर आपकी जान पहचान का कोई ऐसा इंसान है जो डिप्रेशन में रहता है। सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करता है, उम्र के हिसाब से टीनएज में है तो उसे इस गेम के बारे में सचेत करें ताकि वो इस तरह के किसी भी गेम से न जुड़ पाए। इस तरह के गेम में फंसनेवाले बच्चों की पर्सनैलिटी कहीं न कहीं कमजोर होती है। वे दूसरों से ना नहीं कह पाते और परिवार से भी खुलकर अपनी बातें शेयर नहीं करते। इससे जब सामने से कोई उसे डराता है या उसे अपनी बातों से प्रभावित करने की कोशिश करता है तो वे जल्दी उसके जाल में फंस जाते हैं।