साढ़े तीन करोड़ ऐंठने के बहुचर्चित केस में आरोपी हुए बरी
अदालत ने शिकायत को बताया मनघड़ंत कहानी
अमर उजाला ब्यूरो
सफीदों। अक्तूबर 2013 में गांव मुआना के सुभाष की शिकायत पर भुसलाना गांव के संजय व मुआना गांव के रणधीर के खिलाफ दर्ज कराए धोखाधड़ी करने, जबरन वसूली व साजिश रचकर साढ़े तीन करोड़ रुपये ऐंठने के बहुचर्चित आपराधिक मामले में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रवेश सिंगला की अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मामले में शिकायकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे किसी महिला ने जनवरी 2011 में कई बार फोन किया और एक दिन करनाल बस अड्डे पर बुलाया, फिर अपने पति से मिलवाने के बहाने अपने घर ले गई जहां वह चाय पीने से बेहोश हो गया। उसने आरोप लगाया था कि कुछ दिन बाद एक अज्ञात महिला का फोन उसके पास आया, जिसने कहा कि उस पर बलात्कार का केस दर्ज हो गया है।
सुभाष का आरोप था कि बलात्कार तथा इसकी सीडी व फोटो के नाम पर उससे पचास हजार की वसूली की गई, फिर करीब 6 माह बाद किसी अज्ञात महिला ने फोन किया कि उक्त महिला ने आत्महत्या कर उसके खिलाफ सुसाइड नोट छोड़ दिया है जिसे दबाने को पुलिस, डॉक्टर व मीडिया के लिए बीस लाख रुपये आरोपी संजय को दिए और उसके दस-पंद्रह दिन बाद कोई पुलिस अधिकारी बनकर आया कि मामला डीजीपी कार्यालय तक चला गया है। इसके बाद उससे 10 लाख रुपये की मांग की गई जो उसने आरोपी संजय की पत्नी को दिए और इस मामले को दबवाने के नाम पर जनवरी से नवंबर 2011 तक रह रहकर दोनों आरोपियों व सात अन्य लोगों ने उससे कुल साढ़े 3 करोड़ की राशि जबरन वसूली। भोंडसी जेल के एसपी के नाम पर 10 लाख व जींद के सीएमओ के नाम पर 30 लाख रुपये की राशि उसने केस को दबवाने को दी और शिकायत अनुसार क्योंकि शिकायतकर्ता तब जिला पार्षद था वह अपनी छवि बचाने को राशि देता रहा। कथित धोखाधड़ी के करीब पौने तीन वर्ष बाद पुलिस में दर्ज हुए इस मामले में चार वर्ष की सुनवाई के बाद उपमंडल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रवेश सिंगला की अदालत ने जारी फैसले में आरोपों को मनघड़ंत कहानी करार देते हुए टिप्पणी की कि शिकायतपक्ष ने झूठे सबूत तैयार करने का प्रयास किया है।
अदालत ने कहा कि इस आपराधिक मामले का शिकायतकर्ता इतनी बड़ी रकम का जरिया पेश नहीं कर सका तो किसी भी कीमत पर यह नहीं कहा जा सकता है कि आरोपी संजय द्वारा खरीद की गई जमीन का भुगतान उसने शिकायतकर्ता से वसूली गई राशि से किया है। अदालत ने फैसले में कहा है कि यह खुद शिकायतकर्ता के खिलाफ सवाल है कि उसने यह जानने की कोशिश तक नहीं की कि किस महिला ने आत्महत्या कर ली है या उसके खिलाफ कोई केस दर्ज हुआ है और वह आरोपियों को कथित रूप से मांगी गई रकम समय-समय पर देता रहा।