अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। बैंक अधिकारी केंद्र सरकार की शिक्षा ऋण प्रणाली को फेल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। केंद्र सरकार ने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने की एवज में शिक्षा ऋण प्रणाली चालू की है। जिससे देश के लाखों बच्चों को फायदा भी हुआ, लेकिन नरवाना में दो ऐसे मामले सामने आए। जिसमें बैंक प्रबंधन की लापरवाही से बच्चों की सब्सिडी क्लेम नहीं हो पाई। दोनों को करीब पचास-पचास हजार रुपयों की चंपत लगती दिखाई दे रही है। ओल्ड कोर्ट रोड निवासी रामफल बंसल ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे सागर की शिक्षा के लिए एसबीआई बैंक से जुलाई 2011 में लगभग पौने चार लाख रुपये का शिक्षा ऋण लिया था, लेकिन बैंक मैनेजर ने वित्त वर्ष 2014-15 और 2015-16 की सब्सिडी क्लेम नहीं की, जिससे उसे करीब पचास हजार रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है। उसने बैंक मैनेजर और बैंक के आलाधिकारियों को इस मामले से वाकिफ कराया लेकिन कोई संज्ञान लेने की बजाय मैनेजर ने आलाधिकारियों को भी गुमराह करने का काम किया। इसी तरह का मामला रेलवे रोड निवासी प्रवीण कुमार का भी है। प्रवीण कुमार ने अपने बेटे अनंत अग्रवाल की शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण लिया था जिसकी भी सब्सिडी क्लेम नहीं की।
गलती से नहीं हो पाई सब्सिडी क्लेम
एसबीआई बैंक की शाखा के प्रबंधक सरदार जरनैल सिंह मोही से इस बारे बात की तो उन्होंने माना कि उनकी गलती से सब्सिडी क्लेम नहीं हो पाई। सरकार का जब पोर्टल खुला वह अप्लाई नहीं कर सके जिससे उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान हो गया। लेकिन अब जब भी पोर्टल खुलेगा वह सब्सिडी अप्लाई करेंग।