नगर परिषद के उप प्रधान की कुर्सी का फैसला आज
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। शहर की राजनीति में सोमवार को दिन अपनी विशेष पहचान छोड़ जाएगा। सोमवार को नगर परिषद के उप प्रधान विनोद आसरी की कुर्सी बचेगी या नहीं इसका फैसला होगा। डीसी अमित खत्री ने सुबह 11 बजे नगर पार्षदों की बैठक बुलाई है। हालांकि उप प्रधान विनोद आसरी और विरोधी खेमा अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहा है, लेकिन आंकड़ों का गणित क्या करवट लेगा, यह सोमवार को ही तय होगा। फिहलाल दोनों ही पक्ष अपने-अपने पाले को मजबूत करने की करवायद में जुटे हुए हैं।
गौरतलब है कि नगर परिषद के 31 में से 25 पार्षदों ने चेयरमैन पूनम सैनी के नेतृत्व में 20 सितंबर को उप प्रधान विनोद आसरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस डीसी अमित खत्री को दिया था। विरोधी खेमे में इनमें चेयरमैन पूनम सैनी के साथ पार्षद सुनीता, पूजा, रणधीर सिंह, रजनी देवी, राकेश चुघ, हरपाल, कर्मबीर, सीमा, नरेश कुमार, रिंकू नागर, राकेश चुघ, विनोद, मुकेश, प्रवीन कुमार, संतोष कुमारी, जसमेर, संदीप, ज्योति कौशिक, हरेंद्र काला, जिले सिंह जागलान, अन्नु, राजवंती मेहरा, राममेहर ठेकेदार और शोभा गोयल शामिल रहे। हालांकि यह 25 लोग डीसी को नोटिस दे चुके हैं, लेकिन राजनीति में सब कुछ संभव है। ऐसे में दोनों ही पक्ष खुद को मजबूत बता रहे हैं। नोटिस देते समय पार्षदों ने डीसी से नगर परिषद की विशेष बैठक जल्द बुलाने का अनुरोध किया था। डीसी अमित खत्री ने अब नौ अक्टूबर की तरीख इसके लिए तय की है।
यह है हार और जीत का आंकड़ा
जींद जिला परिषद में 31 चुने हुए पार्षद हैं। इनमें से 25 पार्षद उप प्रधान विनोद आसरी के खिलाफ बगावत कर चुके हैं। ऐसे में सामान्य गणित के हिसाब से देखें तो महज छह पार्षद बाहर बचते हैं। इनमें से भी कितने पार्षद विनोद आसरी के साथ आते हैं, यह देखना होगा। वहीं विनोद आसरी को बहुत साबित करने के लिए महज आठ पार्षदों का साथ चाहिए। विरोध खेमे के साथ यदि आठ पार्षद कम हो जाते हैं तो अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा। इसके लिए दोनों ही पक्ष गुणा भाग कर आंकड़ा फिट बैठने में लगे हुए हैं। वहीं चेयरमैन पूनम सैनी का कहना है कि विनोद आसरी के खिलाफ हालांकि 25 पार्षदों ने नोटिस दिया है, लेकिन 26 वोट उनके खिलाफ जाएंगे।
अपने हुए बेगाने
इस पूरे प्रकरण में विनोद आसरी के कई खास समर्थक ही अब विरोधी खेमे में जा मिले हैं। विनोद आसरी दो बार जींद नगर परिषद के चेयरमैन रह चुके हैं। शहर की राजनीति पर खास नजर रखने वालों की मानें तो विनोद आसरी एक ऐसे सख्स से लगातार संपर्क में हैं, जिनको नगर परिषद के आंकड़ों का गणित बनाने और बिगाड़ने में महारत है। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव में उनकी भूमिका क्या होगी, यह समय ही बताएगा।
आपसी खींचतान बनी कारण
हालांकि जींद नगर परिषद की फितरत में ही शांति नहीं है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के पीछे चेयरमैन पूनम सैनी और उप प्रधान विनोद आसरी की आपसी खींचतान बताई जा रही है। पिछले लंबे समय से विनोद आसरी नगर परिषद के सदन की मीटिंगों में भी नहीं आ रहे थे, तभी से इनके मनमुटाव की बात चल रही हैं। हालांकि विनोद आसरी कांग्रेसी होकर भी भाजपा समर्थक चेयरमैन के साथ लंबे समय तक उप प्रधान बने रहे।
सभी पार्षदों ने उप प्रधान विनोद आसरी के रवैये के विरोध में अविश्वास प्रस्ताव दिया है। वे शहर के विकास में रोड़ा बने हुए हैं। ऐसे में उनका जाना तय है। इसके लिए पार्षदों अपने स्तर पर ही काम किया है।
पूनम सैनी, चेयरमैन, जिला परिषद।
विरोधियों की बोलती होगी बंद
मेरा पक्ष मजबूत है। विश्वास हासिल करने के लिए जरूरी आंकड़ा जुटा लिया गया है। जिन लोगों ने विश्वासघात किया है, उनको भी हकीकत का पता चल जाएगा। मैं हर हाल में विश्वास हासिल करूंगा।
विनोद आसरी, उप प्रधान जींद नगर परिषद