जितनी नई बसेें आई नहीं, उससे ज्यादा हुईं कंडम
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। यात्रियों की संख्या को देखते हुए रोडवेज बसों की संख्या कम पड़ रही है। आलम यह है कि जिले की आबादी लगातार बढ़ रही है और बसों की संख्या कम हो रही है। 2015 में रोडवेज में 12 नई बसों को शामिल किया गया था, जिनमें से 16 बसें कंडम हो चुकी थीं। 2015 के बाद से तीन साल के दौरान कोई नई बस रोडवेेज के बेडे में शामिल नहीं हुई थी। 2018 में रोडवेज के बेड़े में 30 नई बसों को शामिल किया गया, मगर एक साल में 32 बसें कंडम हो गईं। इससे स्थिति पहले से भी खराब हो गई। अभी जींद डिपो में कुल 165 बसें है, जो 154 रूटों पर चलती हैं। वहीं 2019 में भी लगभग लगभग आधा दर्जन बस कंडम हो चुकी हैं। बसों की संख्या घटने से लगातार सभी रूटों पर असर पड़ रहा है। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नए रोटेशन से भी पड़ा असर
गौरतलब है कि नंवबर 2018 में रोडवेज चालकों और परिचालकों का ओवरटाइम बंद कर दिया गया है। इसके चलते काफी रूटों पर बसों के चक्कर कम कर दिए गए थे। इसके बाद कर्मचारियों की ऑनलाइन ड्यूटी से भी रोटेशन पर काफी असर देखने को मिला। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था।
35 बसों की और जरूरत
अभी जींद डिपो में कुल 165 बसें ऑन रूट हैं, जो 154 रूटों पर चलती हैं। यात्रियों की संख्या को देखते हुए बसों की संख्या कम है। जींद डिपो में कम से कम 200 बसें होनी चाहिए। इससे सभी रूटों पर सुचारु रूप से बस चले। इस लिहाज से अभी जींद डिपो में 35 बसों की आवश्यकता है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बसों की डिमांड को मुख्यालय भेजी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही डिपो में नई बस शामिल हो जाए।
गुलाब सिंह दूहन, रोडवेज वर्कशॉप मैनेजर।