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जेल की लापरवाही से गई बंदी की जान, जेल की व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवाल

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अमर उजाला ब्यूरो
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जींद।
जेल में चोरी के एक आरोपी उझाना गांव निवासी देवराज द्वारा जेल में बजरी उतारने आए ट्रक के आगे कूद कर आत्महत्या का मामला सामने आया है। इससे जहां जेल प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं देवराज को कानूनी सहायता नहीं मिलने का मामला भी सामने आया है।
दरअसल देवराज पर उझाना गांव में ही चंदू की 15 मण धान चुराने का आरोप है। देवराज के साथ गांव के ही दीपक, सूबा और नरेश को भी पुलिस ने चोरी के आरोप में जेल भेजा था, लेकिन तीनों साथियों की जेल में आने के कुछ दिन बाद ही जमानत हो गई। जेल प्रशासन की मानें तो इससे देवराज परेशान चल रहा था। उसे कानूनी सहायता नहीं मिली और उसकी जमानत नहीं करवाई गई। देवराज की परेशानी के समय ही बजरी का ट्रक जेल के अंदर आने से उसे इसका मौका मिल गया।
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पहले भी विवादों में रही जेल
इससे पहले भी जिला जेल विवादों में रह चुकी है। पिछले साल जेल में डांसर के कार्यक्रम का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम में डांसर पर पैसे उड़ाने की वीडियो वायरल हुई। इसके बाद जेल प्रशासन में काफी फेरबदल किए गए। वहीं जेल में मोबाइल फोन मिलने की घटनाएं आए दिन आती रहती हैं। पिछले सप्ताह ही जेल की चक्की में बंद किए गए बंदियों की तबियत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। तब भी परिजनों ने जेल अधिकारियों पर बंदियों को खाना नहीं देने के आरोप लगाए थे।

परिजन बोले एंबुलेंस में भेज देना शव, गाड़ी की हैसियत नहीं है
नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान देवराज के परिजनों ने पुलिस से गुहार लगाई कि देवराज का शव एंबुलेंस से भिजवाने का प्रबंधन किया जाए। किराये की गाड़ी लेकर जाने की उनकी हैसियत नहीं है। इस पर एंबुलेंस से शव भेजने की व्यवस्था की गई।

विधवा पत्नी के साथ चार बच्चे छोड़ गया देवराज
देवराज की पत्नी माया देवी ने बताया कि वह घर में अकेला कमाने वाला था। पति की मौत से टूटी हुई माया देवी ने कहा कि अब उनके सामने बच्चों को पालने का संकट आन खड़ा हुआ है।

जेल की व्यवस्थाएं नहीं सही
इस प्रकार की घटनाएं जेल के प्रबंधन पर सवाल उठा रही हैं। सोचा जाना चाहिए कि जो व्यक्ति इस प्रकार आत्महत्या करता है, उसे जेल में कितनी परेशानी रही होगी। इससे जेल के सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल उठ रहे हैं। ट्रक आने के समय बंदियों को बैरक में रखा जाना चाहिए था।
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विनोद बंसल, एडवोकेट।

अचानक हुआ है हादसा
जेल में बंदियों को बैरक से बाहर निकलाने और खाना खिलाने का समय निर्धारित होता है। उसी समय शनिवार को भी बंदियों को पार्क में निकाला गया था। अपने साथियों की जमानत हो जाने से देवराज अकेला महसूस कर रहा था। इसके चलते ही उसने यह कदम उठाया है।
हरेंद्र सिंह, जेल अधीक्षक।
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